चौटाला जी डोंट वरी, आप अब भी बन सकते हैं मुख्यमंत्री!
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दिल्ली (ब्यूरो)। जूनियर बेसिक ट्रेंड (जेबीटी) शिक्षक भर्ती घोटाले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला को 10 साल की सजा हो गई है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब चारो तरफ यही चर्चा हो रही है कि चौटाला का राजनीतिक करियर समाप्त हो गया। अटकलें लगाई जा रही हैं कि चौटाला अब कभी भी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। मगर तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता का उदाहरण सामने रखें तो चौटाला के मुख्यमंत्री बनने की उम्मीदें अभी जिंदा हैं। जी हां ओमप्रकाश चौटाला की तरह ही वर्ष 2000 में चेन्नई की स्पेशल कोर्ट ने एआईडीएमके चीफ जयललिता को जया पब्लिकेशन केस में तीन साल की सजा सुनाई थी। id="toptextpromo">इसके
अलावा शशि इंटरप्राइज केस में भी जयललिता को दो साल की सजा सुनाई गई थी। उनकी खास सहयोगी शशिकला नटराजन को भी इन दोनों मामलों में सजा हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार ऐसा शख्स जिसके खिलाफ किसी भी कोर्ट में आपराधिक मामला चल रहा हो और जिसे दो साल से ज्यादा की सजा सुनाई गई हो वह मुख्यमंत्री पद पर नहीं बैठ सकता। लिहाजन जयललिता को अपना पद छोड़ना पड़ा। मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दिए जाने के बाद ओ पनीरसेल्वम को तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनाया गया। id='are-slot-1' class='oiad oi-axt oiadv'> id='top-searched-articles'>मगर
उसके बाद वर्ष 2003 में कोर्ट ने जयललिता को आरोपमुक्त कर दिया। ऐसा होते ही जयललिता के लिये मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचने का रास्ता बिल्कुल साफ हो गया। इतना ही नहीं कोर्ट ने साल 2011 में उन्हें पहले कार्यकाल के दौरान लगे आरोपों से भी बरी कर दिया। सीधे शब्दों में कहें तो ऊपरी अदालत से क्लीन चिट मिलने पर जयललिता की राह आसान हो गई। यानी कि तिहाड़ जेल में नाउम्मीदी में डूबे ओमप्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला के लिये तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता का उदाहरण उम्मीद की एक किरण के रूप में साबित होगा।











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