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झारखंड में राष्‍ट्रपति शासन लागू, जल्‍द चुनाव की संभावना

रांची। राजनीतिक उथल-पुथल के बाद आखिरकार झारखंड में राष्‍ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। राज्‍य में राष्‍ट्रपति शासन लागू करने के प्रस्‍ताव पर महामहिम प्रणब मुखर्जी ने कोलकाता में शुक्रवार को हस्‍ताक्षर किये। अब राज्‍य में विधानसभा चुनाव जल्‍द ही कराये जाने की संभावना बढ़ गई है। माना जा रहा है कि राज्‍य में कर्नाटक के साथ ही मई में चुनाव हो सकते हैं।

वर्ष 2000 में बिहार से अलग होने के बाद से झारखंड में आठ बार सरकारें बदल चुकी हैं। यानी औसतन एक सरकार सवा साल ही चली। कुल मिलाकर देखा जाये तो राज्‍य में राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। इससे पहले 2009 और 2010 में राष्‍ट्रपति शासन लागू किया गया था। 10 दिन पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा और भाजपा के गठबंधन वाली सरकार तब गिर गई जब मुख्‍यमंत्री अर्जुन मुंडा ने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया।

जेएमएम प्रमुख शिबू सोरेन का आरोप है कि उनकी पार्टी और भाजप के बीच डील हुई थी कि बारी-बारी से दोनों पार्टियों से मुख्‍यमंत्री बनेंगे, लेकिन अर्जुन मुंडा पद छोड़ने के लिये तैयार नहीं हो रहे थे। लिहाजा 28 महीनों की सरकार को अधर में छोड़ते हुए जेएमएम ने समर्थन वापस ले लिया। इसी के दूसरे ही दिन मुंडा ने इस्‍तीफा दिया और उसके बाद से सरकार अल्‍पमत में आ गई। इसी बीच विपक्षी दल राष्‍ट्रपति शासन लागू करने की मांग करने लगे।

अब 82 सदस्‍यों वाली इस विधानसभा चुनाव को नया नेतृत्‍व कब मिलेगा, यह बात प्रदेश के राज्‍यपाल सैय्यद अहमद जल्‍द ही राष्‍ट्रपति से मुलाकात करने के बाद तय करेंगे। उम्‍मीद जताई जा रही है कि मई-जून में होने वाले कर्नाटक विधानसभा चुनावों के साथ झारखंड के विधानसभा चुनाव भी कराये जा सकते हैं।

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