अखिलेश को अपना कमांडर नहीं 'टीपू' समझते हैं यूपी के मंत्री
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पिछले साल सपा सरकार के आने के बाद प्रदेशवासियों में एक उम्मीद जागी थी, कि अब उनका राज्य गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश की तरह तेजी से आगे बढ़ेगा। समय तेजी से निकलता जा रहा है। अखिलेश सरकार को एक साल पूरा होने में अब महज तीन महीने शेष हैं, लेकिन न तो फिजा में बदलाव हुआ और न हवा में। इसका सबसे बड़ा कारण हैं 'टीपू'!
जी हां टीपू के कारण ही प्रदेश में कानून व्यवस्था लचर है, टीपू के कारण ही कोई मंत्री सुनता नहीं, यहां तक अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक सभी टीपू को बच्चा समझते हैं। टीपू कोई और नहीं बल्कि मुख्यमंत्र अखिलेश यादव का घर का नाम है और सपा के तमाम नेता आज भी उन्हें टीपू कहकर बुलाते हैं। यानी आज भी वो अखिलेश को अपना कमांडर नहीं, बच्चा मानते हैं।

हम ज्यादा दूर नहीं जायेंगे, कल की बात ही ले लीजिये। उत्तर प्रदेश विधान भवन की 125वीं वर्षगांठ मनायी जा रही है। इस मौके पर सोमवार को आजम खां ने कहा, "हमारे टीपू ने प्रदेश को एक नई दिशा की तरफ मोड़ दिया है। प्रदेश के युवा टीपू से बड़ा प्रेम करते हैं.... ।" आजम पहले भी कई बार मंच पर खड़े होकर अखिलेश को टीपू कहकर संबोधित कर चुके हैं। यही नहीं मुलायम सिंह यादव भी उन्हें पार्टी नेताओं या मंत्रियों के सामने टीपू ही बुलाते हैं।
यह बात कहीं न कहीं अखिलेश यादव को अखरती है, इसीलिये उन्होंने सोमवार को अपने संबोधन में कहा, "मुझे सपा अध्यक्ष माननीय मुलायम सिंह यादव और कैबिनेट मंत्री माननीय आजम खां समेत कई अन्य लोगों से शिकायत है, कि उन्होंने मेरा घर का नाम टीपू, सार्वजनिक कर दिया है।"
भले ही अखिलेश ने आगे कुछ नहीं कहा, लेकिन इससे यह साफ जाहिर हो गया है कि अखिलेश को यह बात अखरती है कि उनके सहयोगी नेता उन्हें बच्चा समझते हैं। इसमें भी कोई संदेह नहीं कि शिवपाल सिंह यादव, आजम खां, अहमद हसन, आदि कई ऐसे नेता हैं, जो मुलायम सिंह के बेहद करीबी हैं और उनकी उम्र के भी, उन्हें आज अखिलेश को अपना कमांडर मानने में शर्म सी महसूस होती है और यदि अगले चार सालों तक वो अखिलेश को अपना लाडला 'टीपू' ही समझते रहे, तो 2017 में आपको यूपी उसी जगह खड़ा मिलेगा, जहां वो 2011 में था।












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