तेलंगाना पर बंद से थम गया आधा आंध्र प्रदेश
हैदराबाद। एक साल बाद एक बार फिर अलग तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर विरोध की लहर फिर से उठने लगी है। तेलंगाना राष्ट्र समिति ने बंद का ऐलान किया, जिससे आम जनजीवन थम गया। टीआरएस का कहना है कि केंद्र सरकार अब हीला-हवाली बरत रही है, जो बर्दाश्त नहीं है। फिलहाल केंद्र की तरफ से इस मामले पर कोई संकेत नहीं मिले हैं, यानी जल्द ही एक बार फिर आंध्र प्रदेश में प्रदर्शनों की बाढ़ आने वाली है।
अलग राज्य की मांग को लेकर तेलंगाना राष्ट्र समिति द्वारा बंद के दौरान राष्ट्रीय राज मार्गों पर बसें नहीं चलीं। प्राइवेट बसों के किराये आसमान छूते दिखे। कई शहरों में दुकानें, व्यापारिक प्रतिष्ठान, स्कूल, कॉलेज आदि बंद रहे। टीआरएस का कहना है कि गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने जो आश्वासन दिये हैं, उन पर वो विश्वास नहीं रकते। केंद्र ने अगर इसी महीने कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो यूपीए को बहुत महंगा पड़ सकता है।

राजनीतिक पक्ष
अगर इसका राजनीतिक पक्ष देखें तो 2014 के चुनाव अब धीरे-धीरे करीब आ रहे हैं। ऐसे में टीआरएस और यूपीए दोनों को अपना वोट बैंक मजबूत करना है। लिहाजा जनता की इस सबसे बड़ी मांग को सभी राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने हिसाब से भुनाने के प्रयास कर रही हैं। कांग्रेस पार्टी जहां इस मामले को अभी कम से कम 2014 तक खींचने के प्रयास करेगी, वहीं टीआरएस चाहेगी कि फरवरी 2013 तक राज्य का बंटवारा हो जाये, ताकि चुनाव से पहले जनता के सामने अपनी पीठ थपथपाने का मौका मिल जाये।
जनता को तकलीफ
आंध्र प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (एपीएसआरटीसी) की सेवाएं ठप हो गई हैं। कर्मचारी संगठनों ने भी काम का बहिष्कार कर दिया है। इससे आम जनता को खासी दक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शहरों में तो फिर भी थोड़ी बहुत बसें चल रही हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात तो पूरी तरह ठप पड़ा है। बस अड्डे वीरान हैं, सड़कों पर लोग क्रिकेट खेल रहे हैं और पार्टी कार्यकर्ता अपने-अपने दफ्तरों में बेठ कर गप्पे मार रहे हैं।












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