अफजल गुरू को फांसी देने पर ही शहीदों को मिलेगी श्रद्धांजलि: सुषमा स्वराज

भाजपा ने इस मुद्दे पर हुई लेटलतीफी पर चर्चा के लिए प्रश्नकाल के स्थगन का नोटिस दिया है। गौरतलब है कि 13 दिसंबर 2001 को ही आतंकवादियों ने संसद भवन पर हमला कर दिया था! जिसके आज 11 साल पूरे हो गये हैं। इस हमले को देश की संप्रभुता पर हमला माना जाता है। भाजपा नेता सुषमा ने इस पर मांग की है कि सरकार अफजल को फांसी देने की तारीख तय करे। वह अफजल को क्यों पाल रही है?
पिछले दिनों मुंबई हमलों के आरोपी अजमल आमिर कसाब को फांसी दे दी गयी थी तभी से यह मांग उठ रही है कि अफजल को भी फांसी दी जाय लेकिन सरकार ने अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है। हालांकि केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सेना स्थापना दिवस के मौके पर कहा था कि शीतकालीन सत्र के समाप्त होने के बाद वह इस पर ध्यान देंगे। राष्ट्रपति ने अफजल के दया याचिका की फाइल गृहमंत्री के पास पुर्नविचार के लिए भेजी हैं।
वहीं इस पर शहीदों के परिजनों का कहना है कि वह मेडल तभी वापस लेंगे जब अफजल को फांसी दी जाएगी। अफजल को फांसी न दिये जाने के कारण शहीदों के परिजनों ने मेडल सरकार को वापस लौटा दिये थे।
आज संसद भवन परिसर में संसद पर हुए हमले में शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। अफजल को फांसी न दिये जाने की वजहों के पीछे यह माना जाता है कि कश्मीर में अफजल को समर्थन प्राप्त है और कुछ मुस्लिम नेता भी अफजल को फांसी दिये जाने का विरोध कर रहे है।












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