कांग्रेस की तरकश के तीर- सोनिया, राहुल और LPG

सीधी बात करें तो गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता लगी थी और ऐसे में पहले चरण के मतदान से ठीक दो दिन पहले मंत्रालय द्वारा सब्सिडी प्राप्त सिलेंडरों की संख्या बढ़ाने की रिपोर्ट आ गई। चुनाव आयोग ने गंभीरता से लिया और पेट्रोलियम मंत्रालय को आगे ऐसी किसी भी घोषणा न करने की हिदायत दी है।
इससे पहले आयोग की फटकार के बाद मोइली का मुंह उतर गया और बोले देश की आम जनता और कई राजनीतिक दल सब्सिडी प्राप्त सिलेंडरों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। मैने यह बात मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कही थी कि सरकार सब्सिडी प्राप्त सिलेंडरों की संख्या बढ़ा सकती है।
बल्कि सच पूछिए तो कांग्रेस की ओर से यह बयान अंजाने में नहीं बल्कि जानबूझ कर आया था। गुजरात चुनाव में वोट बटोरने के लिये जनता को रिझाना अतिआवश्यक है और ऐसे में ऐसे तीर चलाने थे, जो सीधे निशाने पर लगें। इसके लिये पहले खुद सोनिया गांधी ने घूम-घूम कर प्रचार किया। उसके बाद ऐन मौके पर दूसरा तीर (राहुल गांधी) तरकश से निकला। उन्होंने प्रचार के अंतिम पड़ाव पर अपनी सूरत दिखा दी और मोदी सरकार को जमकर खरी-खोटी बातें सुनायीं। इसके बाद भी जब कांग्रेस को लगा कि मामला बन नहीं रहा है, तो तीसरा तीर निकला।
और वो था एलपीजी सिलेंडर का तीर। लेकिन कांग्रेस के इस तीर को चुनाव आयोग ने निशाने पर लगने से पहले ही रोक लिया और तोड़कर फेंक दिया। देखने वाली बात यह है कि गुजरातियों का वोट पक्का करने के लिये अब कांग्रेस की तरकश से कौन सा तीर निकलता है।
खबर का अपडेट- अभी-अभी खबर आयी है किअभी-अभी खबर आयी कि घोषणा चुनाव के बाद होगी। इस संबंध में कांग्रेस कोर कमेटी एक बैठक भी कर रही है। बताया जा रहा है कि सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत 109 रुपए ज्यादा होगी। यानि कांग्रेस वोटरों को रिझाने के लिये कुछ भी करने को तैयार है, आयोग चाहे कुछ भी कर ले।












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