संसद हमले की 11वीं बरसी, अफजल के फांसी का इंतजार

कल भी संसद में विरोधी दलों ने यही कहा कि 13 दिसंबर को देश के मंदिर यानी संसद पर खून बहाने वाले आंतकी अफजल गुरू को 13 दिसंबर को ही फांसी के फंदे पर लटका देना चाहिए। अगर आंकड़ो की बात करें तो बीते 11 साल में तिहाड़ जेल में बंद अफजल गुरू अब तक लाखों रूपये खर्च हो चुके हैं। जिस पर लोग समय-समय पर सवाल उठाते हैं कि आखिर सरकार क्यों उसे जेल में पाल रही है।
आपको बता दें कि जिस दिन अजमल आमिर कसाब को फांसी दी गयी थी उस दिन ही लोगों ने सरकार के लिए ट्विट किया था कि लगता है कि अब अजमल गुरू का भी नंबर आ ही जायेगा और सरकार की ओर से भी कहा गया था कि अब अगला नंबर अफजल गुरू का ही है।
गौरतलब है कि 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हमले की साजिश रचने के आरोप में सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त 2005 को अफजल गुरु के लिए फांसी की सजा सुनायी थी और कहा था कि 20 अक्टूबर 2006 को अफजल को फांसी के तख्ते पर लटका दिया जाये। पर इसके ठीक पहले तीन अक्टूबर 2006 को अफजल की पत्नी तब्बसुम ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल कर दी। पर पांच साल से अधिक समय गुजरने के बाद भी इस पर कोई फैसला नहीं लिया जा सका है। राष्ट्रपति ने इस दया याचिका पर गृह मंत्रालय से राय मांगी। मंत्रालय ने इसे दिल्ली सरकार को भेज दिया जहां दिल्ली सरकार ने इसे खारिज करके गृहमंत्रालय को भेजा, गृहमंत्रालय ने भी दया याचिका पर फैसला लेने में वक्त लगाया लेकिन कहा जा रहा है कि उसने अपनी फाइल राष्ट्रपति के पास भेज दी है अब अंतिम फैसला महामिहम को लेना है।












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