महाराष्ट्र सरकार के गले की फांस बने शिवसैनिक
मुंबई। बाला साहब ठाकरे के निधन के बाद महाराष्ट्र सरकार ने शिवसैनिकों की हर बात मानीं। उन्होंने जो कहा, वो किया, लेकिन अब यही शिवसैनिक सरकार के लिये गले की फांस बन कर रह गये हैं। शिवाजी पार्क पर बने बाला साहब के अस्थाई स्मारक को हटवाने को लेकर सरकार न तो इनते खिलाफ ऐक्शन ले पा रही है और न ही समर्थन में।
शिवाजी पार्क को लेकर शिवसेना की दबंगई अभी भी जारी है। शिवसेना के कार्यकर्ता शिवाजी पार्क में बाला साहब ठाकरे का स्मारक बनाने पर अड़े हुए हैं, जबकि सरकार ने इस बात को मानने से इंकार कर दिया है। सरकार इस समय काफी मजबूर महसूस कर रही है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वी राज चह्वाण ने शिवसेना से कहा, "बाल ठाकरे के अंतिम संस्कार के लिये शिवाजी पार्क पार्टी को दिया गया। जैसी अवस्था में पार्क था, उसी अवस्था में उसे वापस करना होगा। हमारी गुजारिश है कि शिवसैनिक कानून का पालन करें और पार्क को खाली कर दें।"

वहीं शिवसेना के कार्यकर्ता एकनाथ शिंदे ने सीएम को जवाब दिया, "अब ऐसा कतई नहीं हो सकता। हम बाला साहब का 30X30 की भूमि पर बने बाला साहब के अस्थाई स्मारक को हटा नहीं सकते। बल्कि जल्द ही इस स्मारक को पक्का कर दिया जायेगा। इस स्मारक से हजारों शिवसैनिकों की आस्था जुड़ी हुई है।"
उधर वृहद मुंबई मुनिस्पल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) ने भी शिवसेना को इस संबंध में नोटिस भेजा है। बीएमसी का कहना है कि यह पार्क शिवसैनिकों को सिर्फ बाला साहब के अंतिम संस्कार के लिये दिया गया था अब उस पर कब्जा करना कानून के विरुद्ध है।
बीएमसी और राज्य सरकार के तमाम नोटिसों के बावजूद सरकार कोई ऐक्शन नहीं ले पायी है। असल में यह उसकी मजबूरी है, क्योंकि अगर सरकार बाला साहब के अस्थाई स्मारक को वहां से एक इंच भी हिलाती है, तो मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में दंगे भड़क जायेंगे। वहीं अगर यह बात मान लेती है, तो वो कानून के खिलाफ होगा। इस बात की रजामंदी देने वाले अधिकारी कानून के घेरे में आ जायेंगे।
हम आपको बता दें कि शनिवार और रविवार को महाराष्ट्र सरकार पुलिस की मदद से शिवाजी पार्क से अस्थाई स्मारक हटवाने वाली थी, लेकिन यह खबर लगते ही सैंकड़ों की संख्या में शिवसैनिक शिवाजी पार्क पर आ धमके, जिस वजह से सरकार की कोशिशें नाकाम रहीं।












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