90 प्रतिशत भारतीय हैं 'अक्ल से पैदल': काटजू

इसलिए हमारे यहां आसानी से सांप्रदायिक दंगे हो जाते है। यहां करोड़पति इंसान आसानी से चंद रूपयों के लिए धर्म के नाम पर मरने-कटने को तैयार हो जाता है। काटजू ने कहा कि हमारे देश में कोई भी धर्म के नाम पर बड़ी-बड़ी वारदातें कर सकता है और लोग आसानी से इन वारदातों का हिस्सा बन जाते हैं।
न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू ने कहा कि सन्1857 में ऐसी बातें नहीं थी लोग धर्म के नाम पर लड़ाई नहीं करते थे लेकिन अंग्रेजों ने भी लोगो को धर्म के नाम पर लड़ाया तो वहीं अब भी हो रहा है। और देश विकास के साथ आगे बढ़ने के बजाय मूर्खतापूर्ण व्यवहार करते हुए पीछे की ओर बढ़ रहा है। यह सच है, हां यह कड़वा जरूर है लेकिन देश में यही सब हो रहा है।
यहां आसानी से हिन्दू-मुस्लिमों के नाम पर दंगे और विवाद होते हैं और पढ़े-लिखे लोग इस लड़ाई का हिस्सा बनते है। यहां दुष्प्रचार चल रहा है कि हिन्दी हिन्दुओं की भाषा है और उर्दू मुस्लिमों की। जबकि हमारे पूर्वजों ने दोनों भाषाओं का अध्ययन किया है। यहां मंदिर-मस्जिद के नाम पर झगड़े होते हैं। कुछ लोग बेवकूफ भारतीयों के इन मुर्खतापूर्ण मानसिकता का फायदा उठा कर अपना फायदा निकाल रहे हैं जो कि देश के भविष्य के लिए अच्छा नहीं है।
काटजू की इस बात से आप लोग कितने सहमत हैं अपनी राय नीचे लिखे कमेंट बॉकस में दें।












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