विपक्ष की अखिलेश सरकार को घेरने की तैयारी

सपा की कोशिश होगी कि इस सत्र में वह अपने कुछ महत्वाकांक्षी प्रस्तावों को बगैर किसी चर्चा के पारित करा ले जबकि विपक्षियों का प्रयास होगा कि वह समाजवादी पार्टी सरकार को घेरें। ज्ञात हो कि मुख्य विपक्षी दल बहुजन समाज पार्टी, भारतीय जनता पार्टी तथा कांग्रेस ने खराब कानून व्यवस्था को सदन में उठाने का निर्णय लिया है। जबकि राष्ट्रीय लोकदल गन्ने का समर्थन मूल्य अब तक घोषित नहीं किये जाने पर सरकार से नाराज है तथा इस बात को सदन में उठाने का निर्णय लिया है।
सत्र के एक दिन पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आज किसानों की ऋण माफी के लिये 1650 करोड़ रुपए देने की घोषणा कर विपक्ष का एक मुद्दा कम करने की कोशिश की है। सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन के मौके पर उनके मुख्यमंत्री पुत्र अखिलेश यादव ने शुक्रवार से शुरू हो रहे सत्र के बारे में मंत्रियों और विधायकों को होम वर्क कराया। विधानसभा के अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने कल से शुरु हो रहे सत्र के सुव्यवस्थित संचालन के लिए सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से सहयोग का अनुरोध किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सत्र में भी सभी दलों द्वारा इसी प्रकार सहयोग प्रदान कर जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने का कार्य किया जायेगा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सत्तारुढ़ दल की ओर से सदन के संचालन में सहयोग प्रदान करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि पिछली बार सत्र ठीक से चलने के कारण सदस्यों को जनता से सम्बंधित अधिक से अधिक मुद्दों एवं समस्याओं को उठाने का मौका मिला था। मुख्यमंत्री ने सभी दलों से सहयोग की अपेक्षा करते हुए कहा कि सदन में उठायी गयी समस्याओं पर सरकार ने तेजी से फैसले भी लिये थे।
भाजपा विधायक दल के नेता हुकुम सिंह की अध्यक्षता में पार्टी विधायकों की आज हुई बैठक में सरकार की नाकामियों की चर्चा की गयी। श्री सिंह ने बैठक में कहा कि साम्प्रदायिक सौहाद्र बनाये रखने में यह सरकार विफल साबित हुई है। राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। विधानसभा में विपक्ष के नेता बसपा के स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि उनकी पार्टी के पांच साल के शासनकाल में एक भी दंगा नहीं हुआ जबकि सपा के आठ महीने के कार्यकाल में सात साम्प्रदायिक दंगे हो चुके हैं तथा फैजाबाद और बरेली जैसे शहर कफ्र्यू का दंश झेल चुके हैं। कानून व्यवस्था की स्थिति को बनाये रखने में भी यह सरकार विफल साबित हुई है। कांग्रेस और रालोद की यहां हुई बैठक में भी कानून व्यवस्था में गिरावट को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति तय की गयी।












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