गडकरी का कुछ नहीं बिगाड़ पायेंगे यशवंत सिन्हा

हो सकता है आपके मन में सवाल उठा हो कैसे? तो इसका पहला जवाब है पार्टी की साख। कल से शीतकालीन सत्र शुरू होने वाला है और भाजपा केंद्र सरकार को एफडीआई समेत कई मुद्दों पर घेरने वाली है। ऐसे में भाजपा नहीं चाहेगी कि उसकी खुद की साख कमजोर पड़े। दूसरों के घर पर पत्थर उछालने से पहले भाजपा को यह सुनिश्चित करना होगा, कि कहीं उनका घर तो शीशे का नहीं बना है। मतलब साफ है कि पार्टी एकता के सूत्र में बंधी हुई है यह दिखाना इस समय भाजपा के लिये बेहद जरूरी है। लिहाजा यशवंत की बात का कोई असर पार्टी के कार्यकारिणी सदस्यों पर फिलहाल नहीं पड़ने वाला।
दूसरा सबसे बड़ा कारण है लोकसभा चुनाव। मुलायम सिंह यादव ने प्रत्याशी घोषित कर चुनावी बिगुल फूंक दिया है। वहीं कांग्रेस शीतकालीन सत्र के तुरंत बाद प्रत्याशियों की घोषणा की तैयारी में है। ऐसे में अगर भाजपा पार्टी अध्यक्ष के पद को लेकर ही संघर्ष करती रहेगी, तो पार्टी की को हार का मुंह देखना पड़ सकता है। खास बात यह है कि देश की जनता के बीच अंतिम व्यक्ति तक भाजपा का प्रचार करने वाली भाजपा की अंत्योदय इकाई की कमान सीधे गडकरी के हाथ में है। ऐसे में अगर गडकरी को अध्यक्ष पद से उतारा तो देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का पार्टी का सपना टूट सकता है।
तीसरा कारण यह संघ है। जैसा कि सभी को मालूम है कि गडकरी को संघ की सिफारिश पर अध्यक्ष बनाया गया है, ऐसे में संघ के आदेश की नाफरमानी करने की फिलहाल किसी भी नेता में कूबत नहीं है। कुल मिलाकर देखा जाये तो गडकरी का कररियर फिलहाल 2014 के चुनाव तक पूरी तरह सुरक्षित है।












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