कसाब की कब्र तो दो दिन पहले ही खोद दी गयी थी

kasab
पुणे। भले ही मुंबई हमले के गुनहगार अजमल कसाब को यरवदा जेल में दफनाये जाने पर सवाल उठाये जा रहे हो लेकिन सच तो यह है कि उसे दफनाने के लिए कब्र तो दो दिन पहले ही खोद ली गई थी। यह पहले से ही निश्चित कर लिया गया था कि कसाब को जेल में ही दफनाया जायेगा। कसाब को फांसी देने के अभियान को 'आपरेशन एक्‍स' नाम दिया गया था। उसकी कब्र पर कोई खास निशान नहीं होगा। इसे दूसरी कब्र की तरह ही बनाया जायेगा।

यरवदा जेल में कसाब को दफनाये जाने के बाद यह सवाल उठाये जा रहे है कि कसाब को भारत की पवित्र भूमि पर क्‍यों दफनाया गया। इस पर पाकिस्‍तान में भारत के पूर्व उच्‍चायुक्‍त जी पार्थसारथी का कहना है कि जिस तरह से अमेरिका ने ओसामा को समुद्र में दफना दिया था, इसी तरह से भारत को भी करना चाहिए था। उनका कहना है कि एक आतंकवादी को भारत की पवित्र भूमि पर जगह नहीं मिलनी चाहिए थी। हालांकि उन्‍होने सरकार द्वारा लिये गये इस निर्णय पर संतोष जताया और कहा कि आतंकवाद पर कड़ा रूख हमेशा कायम रहना चाहिए।

कसाब को फांसी देने के अभियान में 17 लोग शामिल थे। इसके पहले केंद्रीय मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने बताया कि कसाब की दया याचिका को 16 अक्‍टूबर को राष्‍ट्रपति के पास भेजा गया था। जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्‍ट्रपति ने उसे खारिज कर दिया था। जिसके बाद ही कसाब को उसके किये की सजा देने की पृष्‍ठभूमि तैयार हो गयी थी।

देखिये आपरेशन 'x' के तहत कब क्‍या हुआ-

4 नवंबर को अजमल कसाब का मेडिकल टेस्‍ट हुआ।

5 नवंबर को दया याचिका खरिज।

7 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री ने किया दस्‍तखत।

8 नवंबर को महाराष्‍ट्र सरकार को मिली फाइल।

8 नवंबर को फैसला हुआ कि 21 नवंबर को सुबह साढ़े सात बजे फांसी होगी।

19 नवंबर को आतंकी कसाब को मुंबई की आर्थर रोड से पुणे की यरवदा जेल ले जाया गया।

21 नवंबर को सुबह साढ़े सात बजे अंतत: फांसी दे दी गयी।

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