महंगी बिजली के खिलाफ कानपुर में आंदोलन

ज्ञात हो कि राज्य के व्यापारी पहले भी इसका विरोध कर चुके हैं। व्यापारियों का कहना है कि प्रदेश सरकार ने गत 19 अक्टूबर को अचानक बगैर नोटिस के बिजली दरों में 40 प्रतिशत बढ़ोत्तरी कर दी जिससे उद्योगों की कमर टूट गयी। उनका कहना है कि अन्य प्रदेशों की तुलना में यह दरें कई गुना ज्यादा हैं। उत्तर प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों के लिए बिजली की दर करीब सवा छह रूपये प्रति यूनिट से बढ़ाकर साढ़े आठ रूपये प्रति यूनिट कर दी गई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार बढ़ोत्तरी को वापस या फिर कम नहीं करती तो कारखाने चलाने मुश्किल हो जायेंगे। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील वैश्य ने बताया कि प्रदेश सरकार ने दरों में 40 फीसदी बढ़ोतरी करने के साथ ही दरें एक अक्टूबर से ही लागू कर दी हैं। इसलिये सभी उद्यमियों और व्यापारियों ने यह फैसला लिया है कि बढ़ी हुई दरों के बिजली बिल व्यापारी जमा नहीं करेंगे। बिजली की दरें बढऩे से करीब 70 फीसदी उद्योग धंधे प्रभावित होंगे और मूल्य वृद्धि का सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा जिससे बिक्री घटेगी।
आईआईए के प्रदेश उपाध्यक्ष वैश्य ने बताया कि उत्तर प्रदेश में अन्य प्रदेशों आंध्र प्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड और हरियाणा के मुकाबले बिजली की दरें 20 से 40 फीसदी तक ज्यादा हैं। व्यापारी धरना प्रदर्शन कर जिलाधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे. कानपुर के उद्यमियों की हड़ताल का समर्थन पूरे प्रदेश के उद्यमी कर रहे हैं और वह इस हड़ताल के समर्थन में 22 नवंबर को पूरे प्रदेश में अपने कारखाने दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक बंद रखेंगे। कानपुर में 22 नवंबर को होने वाली इस हड़ताल को आईआईए के अलावा स्माल टेनर्स एसोसिएशन, प्राविंशियल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, दाल मिलर्स एसोसिएशन, फार्मास्यिूटिकल मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन, लघु उद्योग भारती, कानपुर प्रेस ओनर्स एसोसिएशन, कानपुर प्लास्टिक मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन समेत तमाम औद्योगिक संघ शामिल होंगे।












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