दो कौड़ी के नाटककार थे टैगोर: कर्नाड

कर्नाड ने कहा कि बेशक टैगोर बेहतरीन कवि थे लेकिन उनके नाटक दोयम दर्जे के थे इसलिए उनके समकालीन बंगाली थियेटर में उनके नाटक को ज्यादा प्रचार प्रसार नहीं मिला। उनके नाटक ऊबाऊ होते हैं। कर्नाड ने कहा टैगोर से अच्छे तो बादल सरकार, मोहन राकेश और विजय तेंडुलकर जैसे नाटककार हैं जिनका लिखा लोगों की समझ में तो आता है।
टैगोर के बारे में इस तरह की राय रखने वाले गिरीश कर्नाड ने अभी पिछले महीने ही वी. एस. नायपॉल के उस बयान की कड़ी आलोचना की थी जो उन्होंने भारतीय मुसलमानों के बारे में दी थी। कर्नाड ने आरोप लगाया कि रविंद्र नाथ टैगोर ने कभी गरीब वर्ग का चित्रण सही ढंग से नहीं किया क्योंकि वो खुद कुलीन वर्ग से आते थे इसलिए उन्होंने कभी भी उनके साथ न्याय नहीं किया।
कर्नाड के इस बयान की कड़ी निंदा हो रही है। कर्नाड की कड़ी आलोचना दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित सौमित्र चटर्जी ने की है। उनका कहना है कि कर्नाड को खुद बंग्ला आती है नहीं है ऐसे में वो गुरूदेव के नाटकों पर कैसे टिप्पणी कर सकते हैं उन्होंने जो भी कहा वो शर्मनाक है।












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