गिद्धों के लिये खुलेगा वल्चर रेस्टोरेंट

अधिकारी बताते हैं कि गिद्धों के अतिरिक्त किसी अन्य जानवर को यहां भोजन नहीं मिलेगा। महावीर वन्य जीव विहार के वन अधिकारी सुशील शर्मा के अनुसार भोजनालय के लिए किसान अपने मृत पशुओं को यहां भेजेंगे जिसके लिये उन्हें निर्धारित पांच सौ रुपये प्रति जानवर आर्थिक सहायता मिलेगी। इसके साथ उन्हें रेस्टोरेंट तक मृत पशुओं के लाने का वाकायदा किराया भी दिया जायेगा। इस भोजनालय के खोलने के पीछे मंशा यह है कि गिद्धों को भोजन के लिए भटकना न पड़े तथा किसानों को भी पशुओं के मर जाने के बाद कुछ आय हो जाये। इससे ग्रामीण क्षेत्र में मृत पशुओं से होने वाले प्रदूषण को भी रोका जा सकेगा। उन्होंने बताया कि हालांकि प्रदेश में गिद्धों की संख्या भी तेजी से घटी है और इस प्रकार के रेस्टोरेंट खोले जाने से इस प्रजाति को बचाने में कामयाबी मिलेगी।
श्री शर्मा ने बताया कि विलुप्त होने के कगार पर खडे सफाई पंक्षी गिद्धों के बचाने के लिए अनेक उपाय किए जा रहे हैं जिसके तहत गिद्धों को हानि पहुंच रही है। पशुओं की दवा डाईक्लोफीन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। गिद्धों की संतति बढाने के लिए भी प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि पूरे उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक गिद्ध कैमूर के महावीर स्वामी वन्य जीव विहार ललितपुर में पाये जाते है लिहाजा यहां विशेष ध्यान दिया जा रहा है। श्री शर्मा ने बताया कि जीव विहार में 25 फुट लम्बे और इतने ही चौड़े स्थल पर एक बाड़ेनुमा स्थल का निर्माण कराके यहां मृत पशुओं को रखा जायेगा जिसमें गिद्ध स्वयं पहुंचकर अपना भोजन करेंगें। उन्होंने कहा कि ऐसे रेस्टोरेंट चार स्थानों पर खोले जायेंगें। इन्हें वल्चर रेस्टारेंट के नाम से जाना जायेगा। रेस्टोरेंट में मृत जानवर अगल-बगल गांवों से यहां आयेंगें, जिन्हें खुद किसान लायेंगें। उन्होंने बताया कि गिद्धों की दृष्टिï बहुत तेज होती है वह दूर से ही मृत जानवरों को देख सकते हैं। अत: वह स्वयं ही इस स्थल पर पहुंच जायेंगें। उन्होंने बताया कि महावीर वन्य जीव विहार में गिद्धों के 168 घोंसले देखे गए हैं। वैसे 75 की संख्या स्पष्ट दिख रही है।












Click it and Unblock the Notifications