शाख बचाने के लिए वाड्रा की जांच जरूरी यूपीए

Robert Vadra
बैंगलोर। कई घोटालों में उलझी यूपीए सरकार के लिए वाड्रा के आरोप बेहद घातक सिद्द हो सकते हैं अगर यूपीए को अपनी साख बचानी है तो उसे हर हालत में वाड्रा के आरोपों की जांच करवानी चाहिए अन्यथा यह कदम उसके लिए मुसीबत का सबब बन सकता है। यूपीए अपने ही मायाजाल में उलझ कर रही जायेगी और उसके पास अस्तित्व बचाने के लिए कुछ बचेगा नहीं।

आपको बता दें कि यह वो ही सोनिया गांधी हैं जिन्होंने अपनी पार्टी से साल 2006 में हिसार के सांसद कुलदीप बिश्नोई को कारण बताओ नोटिस जारी करवाया था क्योंकि वो गुड़गांव में रिलायंस सेज का विरोध कर रहे थे। उनके मुताबिक गरीब किसानों की जमीन पर प्लाट बनने से किसान बेघर और बेसहारा हो जायेगा। लेकिन कांग्रेस कह रही थी कि इससे किसानों को रोजगार मिलेगा।

जिसके बाद से बिश्नोई को काफी जिल्लतों का सामना करना पड़ा था लेकिन वो टस से मस नहीं हुए और लगातार विरोध करते रहे पार्टी से बाहर का रास्ता भी उन्हें दिखा दिया गया लेकिन अपने उसूलों पर टिके रहने के चलते और पिता की मौत के बाद जनता ने उन्हें उपचुनाव मे जीत दिला दी।

इसके बाद साल 2011 में एक बार फिर से गांधी परिवार पर हरियाणा के किसानों ने उंगली उठायी, वो कोर्ट पहुंचे और आरोप लगाया गया कि राजीव गांधी ट्रस्ट की ओर से 5 करोड़ की जमीन के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया है लेकिन इस मामले को भी समझ-बूझ कर सुलझा लिया गया। इस ट्रस्ट की देखभाल सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ही करते हैं। राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने हमेशा यही लोगों को समझाने की कोशिश की वो हरियाणा के किसानों के साथ है वो उनके साथ अन्याय नहीं होने देंगे।

इसलिए वाड्रा की जांच कराना उनके लिए जरूरी है क्योंकि अगर वो इस बार ढिलाई बरतते हैं तो यह उनके लिए खुद के कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा, वैसे कांग्रेस के लिए यह रामबाण भी साबित हो सकता है। क्योंकि जांच में वाड्रा दोषी हैं या नहीं इस बात का फैसला तो बाद में होगा लेकिन अगर जांच के आदेश कांग्रेस देती है को वो इस फैसले मात्र से ही अपना खोया भरोसा पा सकती है कम से काम हरियाणा में तो ऐसा हो ही सकता है।

आपको बता दें कि केजरीवाल के मुताबिक गुड़गांव में 30 एकड़ जमीन पर हॉस्पीटल बनाया जाना था लेकिन हरियाणा सरकार ने जमीन पर नोटिफिकेशन जारी कर दिया जिसके चलते इस जमीन पर डीएलएफ का कब्जा हो गया और यह सबकुछ राबर्ट वाड्रा के इशारे पर हुआ उन्होंने भी इस पूरी डील में मुनाफा कमाया है। वो इस पूरे मामले में 50 प्रतिशत के पार्टनर थे। यही नहीं वाड्रा ने हमेशा से सोनिया गांधी के दामाद होने का फायदा उठाया है तभी तो उनकी संपत्ति पांच साल 50 लाख से 300 करोड़ की हो गयी है।

केजरीवाल के बाद हरियाणा के पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला ने भी सवाल खड़े किये हैं। उन्होंने भी शक जाहिर किया है कि वाड्रा ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए गुड़गांव से सटे मेवात इलाके की बेशकीमती जमीन से 2 साल में मोटा मुनाफा कमाया है। जबकि कांग्रेस और हरियाणा सरकार ने केजरीवाल के सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है।( नीति सेंट्रल के लेख पर आधारित )

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