जहां कल राष्ट्रपति को आना है, वहां आज लोट रहे हैं कुत्ते
लखनऊ। केजीएमयू प्रशासन भले ही विवि की वास्तविक तस्वीर राष्ट्रपति से छिपाने का प्रयास कर रहा हो लेकिन उनके दौरे से ऐन पहले विवि की ली गयी तस्वीरें बयां करती हैं कि मरीजों को किन मुश्किलों से दो चार होना पड़ता है।
उत्तर प्रदेश की प्राचीन व एतिहासिक मेडिकल यूनिवर्सिटी में कुत्ते व गायों को घूमते आसानी से देखा जा सकता है और मरीज व तीमारदार सड़क किनारे किस प्रकार रात काटते होंगे तस्वीरें यह आसानी से बयां कर देती हैं। बावजूद इसके विवि व राज्य सरकार के अधिकारी परिसर का रंग रोगन व सफाई करा यह दिखाने के प्रयास में हैं कि यहां सबकुछ ठीक और बेहतर है।

कुछ दिनों पूर्व तक छत्रपति साहूजी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय के नाम जाना जाने वाले चिविवि के नाम को तो सपा सरकार ने बदल कर केजीएमयू कर दिया लेकिन वह उसकी हालत में बदलाव नहीं कर सकी। करोड़ों रुपए की लागत से नयी इमारतें बनीं लेकिन परिसर के भीतर इधर-उधर जानवरों के साथ बैठे मरीज बताते हैं कि परिसर में कुछ भी ठीक नहीं है।
केजीएमयू परिसर में खुलेआम चौपाए घूमते दिखायी देते हैं जगह-जगह गंदगी फैली है। राष्टर्पति के आगमन से दो दिन पूर्व चिविवि में ली गयीं तस्वीरें बयां करती हैं कि विवि प्रशासन सिर्फ इमारतों के निर्माण व उपकरणों की खरीद में रूचि ली है न की मरीजों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने शायद यही कारण है कि मरीज बदहाली में अपना इलाज कराने को विवश हैं।
एम्स दिल्ली के पीडियाट्रिक्स सर्जन प्रो. डीके गुप्ता को केजीएमयू का कुलपति नियुक्त किया गया। कुर्सी संभालते ही उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों को हिदायत दे दी अभी तक जो हो रहा था वह अब वह नहीं चलेगा सभी काम सिस्टम से होंगे। उन्होंने यह हिदायत क्यों दी इसका तो किसी को पता नहीं चला लेकिन मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में उम्मीद के मुताबिक कोई सुधार नहीं हुआ। प्रो. गुप्ता का कार्यालय तो सजधज गया लेकिन परिसर में व्याप्त अव्यवस्था में कमीं नहीं आयी। गंदगी व असुविधा का सामना आज भी मरीजों को करना पड़ रहा है।
चिविवि के ट्रामा सेन्टर में आज भी मरीजों को रात में भर्ती नहीं किया जाता। मुख्य चिकित्सा अधिकारी शाम होते ही मोबाइल फोन बंद कर देते हैं। जनसम्पर्क अधिकारी किसी की मदद नहीं कर पाते चिकित्सक आज भी मरीजों की जांचें व दवाइयां बाजार से लिखते हैं लेकिन प्रशासन राष्ट्रपति के सामने विवि की छवि बेहतर बनाने में जुटा है। दो दिन बाद राष्टर्पति केजीएमयू आएंगे लेकिन उन्हें वह हकीकत दिखायी नहीं देगी जो मरीजों की नजर से देखी जा सकती है।












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