समाजवादी पार्टी के मुख में राम बगल में छुरी

सपा ने केन्द्र की नीतियों का विरोध करते हुए कहा कि गलत नीतियों के चलते देश का किसान और आम आदमी संकट में है। पार्टी प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि केन्द्र सरकार सब्सिडी खत्म करके घरेलू अर्थव्यवस्था को बिगाडऩे की साजिश कर रही है। उन्होंने कहा कि डीजल मूल्यवृद्धि का बहाना तेल कम्पनियों के घाटे को बनाया गया जबकि पूंजीनिवेश के नाम पर खुदरा बाजार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी दे दी गयी।
अब प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने खाद सब्सिडी को खत्म करने का सुझाव देकर एक नया संकट खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के मंत्रियों और सलाहकारों की दलील है कि खाद की सब्सिडी खत्म करने से केवल बड़े किसान प्रभावित होंगे जबकि हकीकत यह है कि छोटे किसानों द्वारा इसका इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि आंकडे बताते हैं कि खाद के प्रयोग में सर्वाधिक 55.4 फीसदी वृद्धि छोटे किसानों द्वारा की गयी। उन्होंने कहा कि इसी तरह अर्ध मझोले किसानों में यह वृद्धि 44 प्रतिशत थी जबकि बड़े किसानों में यह मात्र 32.2 प्रतिशत थी। उन्होंने कहा कि स्पष्ट है कि आॢथक सलाहकारों के रुप में जो लोग केन्द्र के दफ्तरों में वातानुकूलित कमरों में बैठकर योजनायें बनाते हैं वे जमीनी हकीकत से कोसों दूर रहते हैं। केन्द्र की नीतियों को देश विरोधी करार देते हुए सपा प्रवक्ता ने कहा कि यह अजीब बात है कि अमरीका जैसा देश भारत में कृषि क्षेत्र से सब्सिडी खत्म करने पर जोर दे रहा है जबकि वहां की सरकार यूएस फार्म बिल-2008 के तहत 307 अरब डालर की सब्सिडी दे रही है। उन्होंने कहा कि यदि केन्द्र सरकार ऐसी ही नीतियां बनाती रही तो किसान कृषि जैसे व्यवसाय से दूर होते जायेंगे।












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