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यूपी में मछली पाल कर रोका जाएगा दिमागी बुखार

Fishery to avoid Japanese Encephalitis
लखनऊ। गोरखपुर व आस-पास के जिलों में मच्छर जनित बीमारी जापानी इन्सेफलाइटिस पर काबू पाने के लिए अब मछलियां पाली जांएगी। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की इस योजना के लिए 39.20 लाख रुपए का बजट निर्धारित किया गया है। इस काम में मत्स्य विभाग स्वास्थ्य विभाग की मदद करेगा। ज्ञात हो कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में पिछले तीन दशकों में इस रोग से करीब 30 हजार से अधिक बच्चों की जान जा चुकी है।

एनआरएचएम ने अपनी योजना के लिए गोरखपुर और बस्ती मंडलों के सात जिलों का आच्छादित किया है। मत्स्य विभाग की मदद से तैयार इस योजना पर 39 लाख 20 हजार रुपये खर्च होंगे जिसके लिए केन्द्र सरकार ने भी हरी झण्डी दे दी है। जापानी इन्सेफ्लाइटिस (जेई) फैलाने वाले मच्छरों के लिए गम्बूसिया प्रजाति की मछलियां पाली जाएंगी जो मच्छरों के लार्वा को खाती हैं।

मिशन महाप्रबंधक डा. अनिल कुमार मिश्र के अनुसार जेई पर प्रभावी नियंत्रण तभी हो सकता है जब मच्छर के लार्वा को बढऩे से रोका जाए। डा. मिश्र ने बताया कि मच्छर में प्रजनन के बाद बनने वाले लार्वा पर नियंत्रण हो जाए तो उनकी संख्या बढ़ नहीं पाती। रासायनिक विधियों से नियंत्रण करने पर जल में रहने वाले जीव जन्तुओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है अत: लार्वा भक्षी मछलियों के पालने की योजना बनायी गयी है।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जेई फैलाने वाले मच्छरों को समाप्त करने के लिए गम्बूसिया और रैटीकुलैट्स प्रजाति की मछलियों के पालने की संस्तुति की है। इन्हें छोटे गड्ढों व तालाबों में पाला जाता है क्योंकि मच्छर आमतौर पर जलभराव वाली जगहों पर ही प्रजनन करते हैं।

डा. मिश्र ने विश्व बैंक द्वारा कराए गए एक सर्वे का हवाला देते हुए बताया कि मछली पालन के बाद भूमिगत तालाबों में जहां 94 प्रतिशत मच्छरों का प्रजनन होता था वह दर 15 प्रतिशत पर आ गयी है तथा छोटे गड्ढों में 100 प्रतिशत एवं बगीचों की फव्वारों में 85 प्रतिशत की कमीं आ गयी है। उन्होंने बताया कि मछली पालन से जेई पर नियंत्रण के लिए प्रथम चरण में गोरखपुर मंडल के गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज तथा कुशीनगर और बस्ती मंडल के बस्ती, संतकबीरनगर तथा सिद्धार्थनगर जिलों को चयनित किया गया है।

मम्बूसिया मछली पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और गुजरात से मंगायी जायेगी जिसकी कीमत करीब चार रुपये प्रति मछली होगी। कुछ समय बाद लोगों को स्वास्थ्य विभाग से नि:शुल्क मछलियां उपलब्ध करायी जायेंगी। इस योजना की सफलता के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की जायेगी जिसके उपाध्यक्ष मुख्य विकास अधिकारी, सचिव मुख्य चिकित्साधिकारी होंगे जबकि अपर जिलाधिकारी प्रशासन, जिला मलेरिया अधिकारी और जिला मत्स्य अधिकारी समिति के सदस्य होंगे।

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