महाराष्ट्र: चाचा पवार की पिच पर भतीजे अजीत की मैंच फिक्सिंग
अब पूरे माजरे पर गौर फरमाते हैं, अजीत पवार उर्फ दादा जो कि पिछले 11 साल से एनसीपी के सबसे मजबूत और महाराष्ट्र सरकार के सबसे ताकतवर सिपाही थे ने मंगलवार को अचानक से सिंचाई मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। अपने आप को पाक-साफ साबित करने के लिए उन्होंने कहा कि जब तक कि वो आरोपों के घेरे में हैं तब तक वो किसी राजनैतिक पद पर नहीं रहेंगे। अपने गुस्से को अपनी मुस्कुराहट के पीछे छिपाते हुए अजीत पवार ने अपनी गेंद अपने चाचा शरद पवार के पाले में डाल दी।
अजीत के जाने के बाद महाराष्ट्र सरकार में अचानक भूचाल आ गया। एनसीपी के कड़े रवैये से घबराये सीएम पृथ्वीराज चव्हाण तुरंत दिल्ली के लिए रवाना हो गये। दिल्ली में सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह की मुलाकात हुई और उसके बाद पृथ्वीराज चव्हाण को कुछ निर्देश दिये गये। जहां दिल्ली में गुणा-भाग हो रहा था वहीं दूसरी ओऱ मुंबई में एनसीपी के खासमखास प्रफुल्ल पटेल मीडिया में बयान दे रहे थे कि अजीत पवार ने जो भी किया वो नैतिकता के आधार पर सही था। एनसीपी उनके फैसले से काफी खुश है। इस बारे में दोबारा सोचना नहीं पड़ेगा।
खबर आयी कि शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले को अजीत की जगह दी जा सकती है ताकि पवार का गु्स्सा शांत हो जाये जिसे सुनने के बाद लोग अभी सोच ही रहे थे कि चलो मामला सुलझ जायेगा लेकिन तभी एक बड़े फैसले ने सबको चौंका दिया कि अब महाराष्ट्र में डिप्टी सीएम की पोस्ट ही नहीं होगी। उसके थोड़ी ही देर बाद पता चला कि एनसीपी की बैठक हो रही है। सारे एमएलए अजीत पवार के इस्तीफे को नामंजूर करने के लिए कह रहे है। विधायकों ने एनसीपी सुप्रीमो से इल्तजा कि महाराष्ट्र सरकार से समर्थन वापस लिया जाये, अजीत पवार को लेकर एनसीपी बंटी हुई है। यही नहीं कुछ विधायकों के इस्तीफे देने की बात भी मीडिया में आयी।
जिसके बाद से घटनाक्रम तेजी से बदल गये। मंगलवार से लेकर बुधवार दोपहर तक जहां बार-बार यह कहा जा रहा था कि महाराष्ट्र सरकार का अस्तित्व खतरे में वहां कहा जाने लगा कि एनसीपी में दो फाड़। चाचा शरद पवार और भतीजे अजीत पवार में बिल्कुल नहीं बनती। अजीत ने इस्तीफा देकर पवार के पावर को ललकारा है और देर रात शरद पवार ने साफ किया कि अजीत पवार का इस्तीफा मंजूर लेकिन एनसीपी अभी भी कांग्रेस के साथ।
जिस तरह से सब्जी में नमक की जगह अगर शक्कर डाल दी जाये तो उसका स्वाद एकदम से विपरीत हो जायेगा उसी तरह से महाराष्ट्र की राजनीति में भी हुआ। मामला भ्रष्टाचार से शुरू हुआ और अंतरकलह पर आकर रूक गया। टीवी चैनलों पर राजनैतिक पंडितों की चल रही बहस में यही कहा जा रहा है कि यह सब कुछ जो हुआ वो सब एक सोची-समझी स्क्रिप्ट थी जिसके किरदार थे अजीत पवार और शरद पवार। हो सकता है कि इस पटकथा के लेखक खुद पवार ही हों।
लोगों और विपक्ष का ध्यान भ्रष्टाचार से हटाने और मीडिया के जरिये लोगों की नजरों में हीरो बनने के लिए यह पूरा नाटक लिखा गया हो क्योंकि जब से अजीत पवार ने इस्तीफा दिया था तब से वो फिल्मी एंग्री हीरो के रूप में सामने आ रहे थे और चारों ओर बार-बार सरकार को गिराने और इ्स्तीफे को मंजूर और नामंजूर करने की बात हो रही थी।
सब ये भूल गये कि आखिर अजीत को इस्तीफा देना क्यों पड़ा? यहां तक कि विपक्ष भी इस बात को भूल गया। अब चारों ओर लोग एनसीपी के मतभेद की बात कर रहे हैं। चाचा शरद और भतीजे अजीत के दम की चर्चा हो रही है अब किसी को ना तो कोई चिठ्ठी याद है औऱ ना ही कोई 75 हजार करोड़ का घोटाला। शरद पवार के फेवरट क्रिकेट की भाषा में कहा जाये तो यह होगा पवार की पिच पर अजीत की मैंच फिक्सिंग।
मालूम हो कि साल 2009 में अजित पवार सिंचाई मंत्री के पद पर थे। इस दौरान उन्होंने सिंचाई से जुड़े 32 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी, जिनमें ज्यादातर प्रोजेक्ट 20 हज़ार से 25 हज़ार करोड़ के थे लेकिन साल, 2012 में सिंचाई विभाग के एक्जिक्यूटिव इंजीनियर विजय पंधारे ने राज्य के सचिव को चिट्ठी लिखकर 35 हज़ार करोड़ के घोटाले की बात कही है जिस पर विपक्ष ने हंगामा किया और बात अजीत के इस्तीफे पर आकर खत्म हुई।कन्फ्यूजन ही कन्फ्यूजन है सल्यूशन का पता नहीं
आप क्या कहना चाहेंगे इस विषय पर।..













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