इतने टेंशन में मनमोहन सिंह कैसे मनायेंगे 80वां जन्मदिन?

मंगलवार को सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में कोई बड़े परिणाम सामने नहीं आये। लेकिन यह ऐलान जरूर कर दिया गया कि यूपीए सरकार 2014 तक अपना कार्यकाल जरूर पूरा करेगी। इन सबके बीच जब पीएम साहब का जन्म दिन होगा, तब सिर्फ वही नहीं, बल्कि उनके इर्द-गिर्द रहने वाले भी टेंशन में होंगे।
उनमें सबसे पहला नाम आता है सोनिया गांधी का, जिनके दिमाग में यूपीए की साख बचाने का टेंशन है, राहुल गांधी जिन्हें अपने करियर की फिक्र सता रही है और एके एंटनी, पी चिदंबरम और कपिल सिब्बल समेत कांग्रेस के कई नेता, जिन्हें अभी से फिक्र होने लगी है कि 2014 में उनकी कुर्सी रहेगी या जायेगी।
वैसे जो लोग टेंशन में नहीं हैं, उनमें सबसे ऊपर नाम आता है पूर्व वित्तमंत्री एवं राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी। वैसे पीएम साहब को हैप्पी बर्थडे भी वही सबसे पहले कहेंगे। दूसरा फोन कॉल आने की संभावना है मुलायम सिंह यादव की तरफ से, क्योंकि वो इस समय पीएम साहब का दर्द अच्छी तरह समझ रहे हैं।
खैर जन्मदिन के उपलक्ष्य में अगर डा. मनमोहन सिंह के करियर की बात करें तो केंद्र सरकार में कई मंत्रालय संभाल चुके मनमोहन सिंह का करियर अब लगभग खत्म होने की कगार पर है। वैसे भी राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो 2014 में मनमोहन यूपीए के उम्मीदवार नहीं बनेंगे। वहीं गांधी परिवार की बायोग्राफी लिखने वाले राशिद किदवई की मानें तो अगले उम्मीदवार राहुल गांधी ही होंगे।
वैसे भी पीएम साहब के करियर का शुरुआती दौर जितना स्वर्णिम रहा, वर्तमान में उतना ही ज्यादा कठिन हो गया है। विदेशी पत्रिकाओं में उन्हें अंडरअचीवर करार दिया जाना एक बड़ा धब्बा है। खैर ऐसी आलोचनाओं से कोई भी व्यक्ति दूर नहीं भाग सकता।
जीवन की कुछ खास बातें
गाह (जो अब पाकिस्तान में है) में पैदा हुए मनमोहन सिंह ने यहाँ पंजाब विश्वविद्यालय से स्नातक तथा स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई पूरी की। बाद में वे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय गये। जहाँ से उन्होंने पीएच. डी. की। तत्पश्चात् उन्होंने आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से डी. फिल. भी किया। मनमोहन सिंह ने अर्थशास्त्र के अध्यापक के तौर पर काफी ख्याति अर्जित की। वे पंजाब विश्वविद्यालय और बाद में प्रतिष्ठित दिल्ली स्कूल आफ इकनामिक्स में प्राध्यापक रहे। इसी बीच वे संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन सचिवालय में सलाहकार भी रहे और 1987 तथा 1990 में जेनेवा में साउथ कमीशन में सचिव भी रहे।
1079 में डा. सिंह भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मन्त्रालय में आर्थिक सलाहकार के तौर पर नियुक्त किये गये। इसके तुरन्त बाद 1972 में उन्हें वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार बनाया गया। इसके बाद के वर्षों में वे योजना आयोग के उपाध्यक्ष, रिजर्व बैंक के गवर्नर, प्रधानमन्त्री के आर्थिक सलाहकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष भी रहे हैं। भारत के आर्थिक इतिहास में हाल के वर्षों में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब डा. सिंह 1991 से 1996 तक भारत के वित्त मन्त्री रहे। उन्हें भारत के आर्थिक सुधारों का प्रणेता माना गया है। आम जनमानस में ये साल निश्चित रूप से डा. सिंह के व्यक्तित्व के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। 2004 में वो प्रधानमंत्री बने।












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