अन्ना-केजरीवाल, आंदोलन-राजनीति से नहीं हारेगा भ्रष्टाचार

नई दिल्ली। अन्ना से अलग होने के बाद पहली बार अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया है कि वो अपनी राजनीतिक पार्टी बना रहे हैं। अब पार्टी का नाम क्या होगा और उसकी रूप- रेखा क्या होगी इन सारी बातों का ऐलान वो 2 अक्टूबर यानी गांधी जी के जन्मदिन पर कर सकते हैं। केजरीवाल ने साफ किया कि वो खुशी से राजनीति में नहीं उतर रहे हैं। वक्त और हालात की मजबूरी ने उन्हें यह फैसला लेने पर मजबूर किया है।

केजरीवाल के इस बयान पर चौतरफा प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गयी हैं। किसी की नजर में केजरीवाल का फैसला सही है तो किसी की नजर में अन्ना का निर्णय। फेसबुक, टि्वटर, टीवी चैनल और अखबार, हर जगह बस लोगों की प्रतिक्रियाओं से भरी पड़ी हैं। किसी को अहिंसावादी अन्ना सही लगते हैं तो किसी को केजरीवाल का आक्रामक रवैया भा रहा है।

इन्ही सब के बीच में राष्ट्रीय कवि और व्यंग्यकार अशोक चक्रधर ने अपनी कविता में लिखा है कि ना तो आंदोलन से और ना ही राजनीति से देश का भ्रष्टाचार मिटने वाला है। इसके लिए आत्मन्ना की जरूरत है। अगर जब तक आत्मा अनशन नहीं करेगी तब तक देश से भ्रष्टाचार लुप्त नहीं होगा।

अशोक चक्रधर ने अपनी कविताकोश में कुछ इस तरह से अपनी बात कही है।

प्रश्न 1. अनाड़ी जी, अन्ना ने भ्रष्टाचार की समाप्ति का बिगुल बजाया है। क्या आपको लगता है कि ऐसे आंदोलनों से भ्रष्टाचार समाप्त हो सकेगा?

भ्रष्टाचार इस व्यवस्था में
रूप बदल-बदल कर
और अधिक व्याप्त होगा,
वह अन्ना से नहीं
आत्मन्ना से समाप्त होगा।

तब, जब आत्मा अनशन नहीं करेगी
अन्न खाएगी,
स्वयं को स्वस्थ बनाएगी,
मीडिया के आगे
स्वांग नहीं रचाएगी।

ये सब तमाशा है
पर मुझे अपने युवाओं से आशा है।
ये अनाड़ी उन्हीं की ओर तकता है,
युवा क्या नहीं कर सकता है!

कहते हैं जहां ना पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि..अशोक चक्रधर ने भी अपनी लेखनी से लोगों को कुछ समझाने की कोशिश की है देखते हैं चक्रधर जी की इस बात का भावार्थ कितने लोगों को समझ में आता है और कितने लोगों के लिए यह बस एक कविता ही बन कर रह जाती है।

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