कौन कहता है देश तरक्‍की नहीं कर रहा?

Who says India is not shining?
सुना है देश तरक्की कर रहा है। जी हाँ आपने भी बिलकुल सही सुना है, देश तरक्की कर रहा है। अब आप सोच रहे होंगे कैसे, तो आपको बता दूं की अभी कुछ दिनों पहले ही ये बात मैंने भी एक प्रतिष्ठित अखबार के जरिये जानी थी। वैसे भी इस देश में आये दिन नयी-नयी पॉलिटिकल पार्टियों का गठन, अपना हक़ मांगने के लिए हड़तालें, राजनेताओं के स्टंट, उनके स्कैम, बढ़ती महंगाई, आसमान छूते गैस के दाम, पेट्रोल और डीजल के दाम, महानगरों में रेव पार्टियां, बेटी की इज्जत को तारतार करता बाप, बच्चों को साथ लेकर पड़ोसी युवक संग भागी महिला (मुहब्बत जो न कराए वो कम है), हाथ में डिग्री का पोथा लिए रोज़गार की तलाश में दर-दर की ठोकर खाता देश का युवा, नौकरी न मिलने के चलते होने वाली आत्महत्याएं, बिन रिश्वत पासपोर्ट का न मिलना, राशन कार्ड न बनना, रेल के अदना से टिकट के लिए घंटों लाइन लगाना, नंबर आने पर काउंटर पर बैठे व्यक्ति का ये कहना की आपको रेल में आरक्षण नहीं मिल पायगा।

आरक्षण से याद आया यदि आप एक विशेष दर्जे से ताल्लुक रखते हैं, तो ठीक वरना बड़ी बुरी स्थिति हो सकती हैं आपकी। इसके चलते न तो आप अच्छी नौकरी प्राप्त कर सकते हैं न ही किसी अच्छे संस्थान में शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं। ये वो चंद उदहारण हैं, जो ये बताने के लिए काफी हैं की हमारा देश तरक्की कर रहा है।

जी हां यही सच्चाई है। शायद आपको मेरी बातें कड़वी लगें। आप में से कोई ये कहे की लेखक के मन में कुंठा घर कर गयी है। उसके चारों ओर नकारात्मक उर्जाओं ने अपना वास कर रखा है। हो सकता है मेरे इस लेख को पढ़ने के बाद मुझे कुछ ज्यादा ही क्रिटिसाइज करें या दूसरी तरफ ऐसा भी हो सकता है कि इन बातों को जानने के बाद समाज का एक बुद्धिजीवी कुछ सोचे। लेकिन सच्चाई तो सच्चाई है और वैसे भी बड़े बुजुर्गों ने फ़रमाया है कि सच्चाई नीम से कड़वी और नीबू से ज्यादा खट्टी होती है।

हम में से ऐसे बहुत से हैं जो ये कहते हैं की आखिर कहां जा रहा है हमारा देश इससे अच्छा दौर तब था जब अंग्रेज हम पर हुकूमत कर रहे थे। कम से कम हर चीज नीयम कानून से थी कोई गड़बड़ घोटाला कोई गोलमाल नहीं था। ऐसे लोगों का ये भी मानना है कि अगर फिरंगी यहाँ न आये होते तो शायद आज हम रेल में सफ़र और बेहतरीन वास्तुकला का लुत्फ़ न ले पाते। तो ऐसे लोगों के सन्दर्भ में मैं बस इतना ही कहना चाहूंगा कि उन्हें ये नहीं भूलना चाहिए कि अंग्रेजों ने हम पर कोई 300 साल से अधिक शासन किया है और जो भी उन्होंने बनाया हमारे लिए नहीं बल्कि अपनी सुविधा के लिए बनवाया था। ये और बात है की आज हम आज़ाद हैं और इसका इस्तेमाल अब हम कर रहे हैं।

प्रायः ऐसा होता नहीं है, लेकिन कभी कभी टार्गेट अचीव करने के चलते आप दफ्तर से घर देरी से जरूर निकले होंगे। जब आप ऑफिस से देर से घर जाते होंगे तो अक्सर सड़क किनारे सोते हुए लोगों को जरूर देखा होगा। ये वो लोग हैं जो दिन भर हाड़ तोड़ मेहनत करते हैं दो जून की रोटी के लिए अपना खून पसीना बहाते हैं। ये वो लोग हैं, जिनका मानना है की बॉलीवुड केवल मिथुन, धर्मेन्द्र और जीतेंद्र की फिल्मों तक सीमित है। ये वो लोग है जिनको सरकार रसोई गैस पर सब्सिडी देती है मगर अफ़सोस की बात ये आज भी लकड़ी जलाकर अपना खाना बनाते हैं। इनकी ज़िन्दगी सुबह 5:30 बजे होती है जो शाम के 7:30 बजते-बजते सोने के लिए जगह तलाश करती नज़र आती है। ये कहना बिलकुल भी अतिश्योक्ति नहीं होगी की ये है असल भारत यानी की रीयल इंडिया।

अब शायद आप ये सोचें की मैंने ऐसा क्यों कहा? वो इसलिये क्‍योंकि जिनके लिए समस्त सरकारी योजनाएं हैं। आपको पता है सरकार इन लोगों का कितना ध्यान रख रही है? इंदिरा आवास योजना, गैस और केरोसीन के दामों में सब्सिडी, सस्ते दामों में मिलने वाली चीनी और गेहूं, कन्या विद्या धन, मिड डे मील, मनरेगा ऐसी बहुत सारी चीजें सब इन्ही लोगों के लिए तो हैं, लेकिन अफ़सोस शायद ही ये चीजें इन बेचारों को मिल पाती हों। क्योंकि ये सब सुविधाएं इन लोगों के लिए सरकारी फाइलों तक ही सीमित हैं। इन्हें ये सब चीजें मिलती हैं, लेकिन सिर्फ फाइलों में।

पार्टी चाहे कोई भी हो नेता कोई भी हो इस रीयल इंडिया से सभी प्यार करते हैं। अरे भाई ये उनका वोट बैंक जो है। बड़ी-बड़ी रैलियां कर इन्हें बताया जाता कि अगर ये वाले नेता जी सत्ता में आ गए तो क्या होगा अगर वो वाले नेता जी आ जाएंगे तो क्या होगा। घूम फिर कर इनसे इन नेताओं की यही दरकार होती है कि वो लोग नेता जी को वोट दें। एक बात और जो आपको गुदगुदाएगी जरूर लेकिन हां हो न हो आप एक बार सोचने पर अवश्य विवश हो जाएंगे। ये वो लोग हैं, जिनके भाग्य में लग्जरी गाड़ियां नहीं हैं। इनके लिए मारुती 800 या फिर मारुती वैन में बैठना भी किसी सुहाने सपने से कम नहीं होता। इन लोगों का ये सपना तब पूरा होता है जब इन्हें इलेक्‍शन वाले दिन नेता जी के गुर्गों द्वारा इन गाड़ियों में बैठाकर पोलिंग बूथ तक ढोया जाता है।

मित्रों स्थिति बड़ी ही गंभीर है समस्या बड़ी ही व्यापक है आज भले ही हम मॉल कल्चर में जी रहे हों, भले ही आज हमारी जीडीपी बढ़ गयी हो, भले ही आज बड़ी-बड़ी कम्पनियां हमारे युवाओं को अपने यहाँ हायर कर रही हों मगर असल वास्तविकता कुछ और है। आज भले ही अच्छे विकल्पों की तलाश में गाँव से निकल कर व्यक्ति शहरों की तरफ पलायन कर रहा है, मगर कहीं न कहीं अभी भी हम बहुत पीछे ही हैं। कहा जाता है की हम विकासशील से विकसित हो रहे हैं मगर असल में कहां जा रहा है, लेकिन वास्‍वकिता कोसों दूर है।

मैंने बुजुर्गों से कभी एक बात सुनी थी की किसी समय हमारा देश सोने की चिड़िया था यहां दूध की नदियाँ बहती थीं। वो दौर मैंने देखा नहीं तो मैं ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहूंगा मुझे बस इतना पता है जब मैं पैदा हुआ तो उसके कुछ वर्ष पूर्व इंदिरा गाँधी की हत्या हुई थी। एक समुदाय के लोगों को दोषी ठहराते हुए उन्हें काटा जा रहा था। उनकी बहन बेटियों की इज्जत को तार तार किया जा रहा था। देश में आपातकाल लागू कर दिया गया था। मेरे जन्म के कुछ वर्षों बाद देश के एक महान नेता कहे जाने वाले राजीव गाँधी की हत्या हुई उससे पहले बोफोर्स घोटाला हो चुका था। कुछ समय बाद बाबरी मस्जिद को गिराया गया। बात अगर अभी हाल ही के वर्षों की करूं तो यहां कॉमन वेल्थ गेम घोटाला हुआ, 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला हुआ, खाद्यान्न घोटाला हुआ, कई बार लोकसभा स्थगित हुई, वर्तमान में कोलगेट घोटाला सबके सामने हैं जिसके चलते विपक्ष प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है। अब मुझे कोई ये बता दे की आखिर कैसे हिन्दुस्तान गरीब है और वो तरक्की नहीं कर रहा है।

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