क्यों है राज ठाकरे को समझना जरूरी?

हम यह नहीं कह रहे हैं कि राज ठाकरे पूरी तरह सही हैं, लेकिन उनकी कुछ बातों पर गौर करना जरूरी है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, आदि की जनता, पुलिस, मीडिया और खास कर नेताओं को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख की कुछ बातों को समझना क्यों जरूरी है, यही बताने की मैं कोशिश कर रहा हूं। वो भी उन मुद्दों को उठाते हुए, जो ऐसे में सबसे ज्यादा उछाले जाते हैं। मेरा यह लेख अंग्रेजी टीवी चैनल टाइम्स नॉव पर राज ठाकरे के एक इंटरव्यू पर आधारित है।
1. मुंबई में अपराध
राज ठाकरे- मुंबई में जब भी कोई बड़ा अपराध होता है, तो राज ठाकरे उत्तर भारतीयों के खिलाफ बयान देने से नहीं चूकते हैं। हम हर बार उन्हें गलत ठहराकर, कह देते हैं कि वो शांति व्यवस्था को भंग कर रहे हैं। ठाकरे का दावा है कि 2012 में अब तक 19 हजार आपराधिक मामले आये, जिनमें से 50 फीसदी में यूपी, बिहार वालों का हाथ था और करीब 1200 लोग यहां आये और क्राइम करने के बाद चले गये। तो यूपी बिहार वालों पर गुस्सा क्यों न आये?
इस पर मंथन-यदि ये आंकड़े एकदम सही हैं, तो यह यूपी, बिहार के लिये शर्मनाक बात है। इन दोनों राज्यों की सरकारों को सोचना होगा, कि आखिर उनके लोग दूसरे राज्य में जाकर अपराध क्यों करते हैं, सोचना ही नहीं, बल्कि किसी हल तक पहुंचना होगा, जो यूपी बिहार वालों को क्राइम करने से रोक सके। इन दोनों राज्यों का क्राइम ग्राफ ही है, कि तमलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश के लोग भी इन राज्यों के लोगों के बारे में नकारात्मक धारणा रखते हैं।
2. रोजगार
राज ठाकरे- हर रोज 48 ट्रेनें सिर्फ यूपी बिहार से मुंबई तक आती हैं। इतनी भारी संख्या में यहां लोग क्यों आ रहे हैं, इसकी मुख्य वजह रोजगार है। उत्तर प्रदेश से इतने प्राइम मिनिस्टर हुए। जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, वीपी सिंह, चंद्रशेखर, आदि। यूं कहिये कि देश को सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री देने वाला राज्य यूपी है, लेकिन फिर भी वहां बेरोजगारी और अपराध चरम पर है। यूपी से लोग इतनी भारी संख्या में क्यों बाहर जा रहे हैं? काम के लिये। इन्हीं लोगों को जब काम नहीं मिलता है तो अपराध करते हैं। गुजराती यहां (मुंबई) आकर कोई अपराध नहीं करते। यूपी वाले यहां आकर नेता बनने की कोशिश क्यों करते हैं।
इस पर मंथन- राज ठाकरे की यह बात उन सभी प्रधानमंत्रियों के कार्यकल पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है, जो लोग खुद बढ़े, लेकिन यूपी को नहीं बढ़ाया। ठाकरे की यह बात कि यूपी से इतनी भारी संख्या से लोग बाहर क्यों जा रहे हैं?, सीधे तौर पर वर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिये बड़ा सवाल है, जिसका हल उन्हें खोजना ही होगा। इस बात में कोई शक नहीं कि यूपी के कानपुर, मुरादाबाद, बरेली, आदि जैसे शहर जो कभी इंडस्ट्रियल हब हुआ करते थे, उद्योग बंद हो रहे हैं। ऐसे में लोगों का रोजगार के लिये बाहर जाना लाजमी है। कम वेतन भी एक बड़ा फैक्टर है, क्योंकि महाराष्ट्र, कर्नाटक, आदि राज्यों में निजी कंपनियों में वेतन अच्छा दिया जाता है।
3. मीडिया पर निशाना
राज ठाकरे- मैं मीडिया के खिलाफ नहीं हूं, मैं उन चैनलों के खिलाफ हूं, जो बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश करते हैं। हाल ही में मैंने ऐसा करने पर एक चैनल हेड को फोन किया, तो जवाब मिला राज तुम हमारी टीआरपी हो। जब भी बड़ी खबर आती है, चैनल वाले चार लोगों को स्टूडियो में बुलाकर परिचर्चा शुरू कर देते हैं। परिचर्चा तक तो ठीक है, लेकिन जो टीवी चैनल मुद्दे पर अपना फैसला सुनाने लगते हैं और यह कहते हैं कि यही देश का फैसला है, तो मुझे गुस्सा आता है, क्योंकि फैसला करने वाला कोर्ट है, मीडिया नहीं।
इस पर मंथन- राज ठाकरे की यह बात एकदम 100 फीसदी सही है। कि टीवी चैनल अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिये कुछ भी कर गुजरते हैं। सच पूछिए तो यह बात मीडिया को समझनी चाहिये, कि यह करना गलत है। इससे जनता का गुस्सा भड़क सकता है, सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंच सकता है।
4. पाकिस्तान का मुद्दा
राज ठाकरे- मैं आशा भोंसले दीदी का बहुत सम्मान करता हूं, लेकिन मुझे तब ठेस पहुंची जब उन्होंने सुरक्षेत्र में जज बनने का फैसला किया। गुस्सा तब आया जब शो में पाकिस्तानी और बांग्लादेशियों को न्योता दिया गया। यह बात सिद्ध हो चुकी है कि भारत में आतंकवाद पाकिस्तान फैलाता है, तो वहां के गायकों को क्यों बुलाया गया। क्या वहां के चैनल वाले हमारे कलाकारों को जज बनने के लिये बुलाते हैं?
इस पर मंथन- राज की यह बात कुछ हद तक तो सही है, लेकिन हां हम इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि अगर हमें पाकिस्तान से दोस्ती का हाथ बढ़ाना है, तो ऐसे कार्यक्रम प्रेम का रस घोलने का काम कर सकते हैं।
इस पूरे साक्षात्कार में राज ठाकरे ने यूपी, बिहार के लोगों के खिलाफ कई उत्तेजक बयान दिये। एक नजरिये से देखा जाये तो उन बयानों को सुनने के बाद हर कोई भड़क सकता है। लेकिन सच पूछिए तो राज ठाकरे को समझना बेहद जरूरी है। क्योंकि अगर नीतीश कुमार और अखिलेश यादव के पास राज के इन सवालों का जवाब नहीं है, तो यह उनके लिये शर्म की बात है।
मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी कहा जाता है। यूपी बिहार के लोग सीना चौड़ा करके कहते हैं, कि मुंबई की अर्थव्यवस्था विकसित करने में उनका हाथ है। हमारा सवाल यह है कि अगर यूपी-बिहार के पास इतनी ही अच्छी मैन पावर है, तो उनकी सरकारें उनका सही इस्तेमाल क्यों नहीं करतीं। क्यों उन्हें दूसरे राज्यों में जाकर नौकरी के लिये दर-दर भटकना पड़ता है।
बात अगर देश की आंतरिक सुरक्षा की करें तो टीवी चैनलों को खास तौर से राज ठाकरे के बयान को भड़काऊ नहीं बनाना चाहिये, क्योंकि ऐसा करने से कभी भी कहीं भी दंगा भड़क सकता है। वहीं केंद्र सरकार को भी उन्हें यह हिदायत बार-बार देनी चाहिये कि वो भड़काऊ बयान नहीं दें।
यह बात भी माननी पड़ेगी कि राज ठाकरे बोलते वक्त क्या बोल जाते हैं, उन्हें खुद पता नहीं होता, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि उनकी कई बातें 100 फीसदी सही और तक संगत होती हैं। एक वाक्य में कहें तो राज ठाकरे की बात गलत नहीं होती, उनका कहने का तरीका गलत होता है।












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