माया-मुलायम ने उड़ायी केन्द्र सरकार की नींद

उत्तर प्रदेश में बसपा प्रमुख मायावती और सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के बीच छत्तीस का आकड़ा है। इसकी मुख्य वजह भी जातिगत राजनीति है। प्रोन्नति में आरक्षण को लेकर संसद में हुए हंगामे की मूल वजह पर गौर किया जाये तो पता चलता है कि दोनों ने ही यह हंगामा कराया है। यदि प्रोन्नति में आरक्षण का विधेयक पारित हो जाता तो इसका फायदा बसपा को ही मिलेगा। बसपा को फायदा न मिले इसके लिए सपा पुरजोर कोशिश में है। हालांकि इससे यूपी सरकार को भारी नुकसान हो रहा है क्योंकि प्रदेश में कर्मचारियों की हड़ताल के कारण राजस्व की भारी हानि हो रही है।
इस विधेयक को लेकर जहां इन दोनों नेताओं ने देश की संसद को हिलाकर रख दिया वहीं प्रदेश की राजनीति में भी इसको लेकर हलचल मचा दी। विधेयक को लेकर सड़कों पर हंगामा प्रदर्शन चल रहा है। इन दो धुर विरोधी दलों में एक चाहता है कि विधेयक पारित हो जाये और आगामी लोकसभा चुनाव में उसे इसका भरपूर फायदा मिले वहीं दूसरा दल किसी भी कीमत पर किसी अन्य को राजनीतिक लाभ नहीं देने के पक्ष में है।
ऐसे में यह तो तय है कि इन नेताओं ने जो शिगूफा छोड़ा है उससे एससी/एसटी को प्रोन्नति में आरक्षण मिले न मिले लेकिन इन दलों को राजीनीतिक लाभ जरूर मिलेगा। विधयेक पारित न होने के लिए सपा को सीधे तौर पर जिम्मेदार बता रही बसपा अन्य दल जैसे कांग्रेस व भाजपा को भी आड़े हाथों ले रही है। बसपा प्रमुख मायावती का कहना है कि भाजपा व कांग्रेस चाहे तो विधेयक पारित हो जाता लेकिन सपा सदस्यों के हंगामें की आड़ में इन दलों ने भी मौन साध लिया और यह विधेयक एक बार फिर अटक गया। बहरहाल विधेयक पारित हो या न हो लेकिन यह तो तय है कि आगामी लोकसभा चुनाव में यह दल आरक्षण को बतौर चुनावी हथियार जरूर इस्तेमाल करेंगे।












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