गुटखा खाने से लोगों को मिलती है खुशी

यूपी में गुटखा की फैक्ट्रियां
वैसे तो गुटखा प्रदेश के सभी जिलों में बनता है लेकिन कानपुर, आगरा व मथुरा में इसकी कई फैक्ट्रियां हैं जहां गुटखा बड़े पैमाने पर निर्मित होता है। गुटखा की फैक्ट्रियां अब तो राजधानी में भी खुल चुकी है जहां खुलेआम गुटखा बनता है। यह फैक्ट्रियां रिहायशी इलाकों में भी हैं जिसके लिए प्रदूषण विभाग आदि से शिकायतें भी की गयीं लेकिन सरकार का खुला सरंक्षण और अधिकारियों की कमाई का जरियां बनी फैक्ट्रियां खुलेआम चल रही हैं।
चिकित्सकों की राय
गुटखा व तम्बाकू उत्पाद स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है यह चेतावनी सिर्फ कहने सुनने के लिए रह गयी है। चिकित्सकों का कहना है कि तम्बाकू चबाने से मुंह के कैंसर समेत 40 प्रकार के कैंसर हो सकते हैं। तम्बाकू 25 प्रकार की बीमारियों का कारण है और लम्बे समय तक तम्बाकू का प्रयोग करने से यह बीमारियां हो सकती हैं। चिकित्सकों का कहना है कि निकाटीन का प्रयोग व्यक्ति के नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है। केजीएमयू के चेस्ट रोग विशेषज्ञ डा. सूर्यकांत का कहना है कि तम्बाकू अन्य प्रकार के नशों से अधिक खतरनाक है और मात्र 3 से 5 प्रतिशत लोग ही इस लत को छोड़ पाते हैं।
कहां-कहां लग चुका है प्रतिबंध
अब तक जिन राज्यों में प्रतिबंध लग चुका है, उनमें केरल, मध्य प्रदेश, बिहार, हरियाणा, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान हैं। केंद्र शासित चंडीगढ़ में भी बैन लगा हुआ है। वहीं केरल के मुख्यमंत्री ने कर्नाटक के सीएम जगदीश शेट्टार से राज्य में प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया है। उसके बाद कर्नाटक में भी तैयारी शुरू हो चुकी है।
हमारा सवाल
अब इन सभी तथ्यों के बीच यूपी के मुख्यमंत्री प्रदेश का राजस्व बढ़ाने पर जोर देंगे या लोगें के स्वास्थ्य की चिंता करेंगे। या फिर वो इन सभी बातों का ध्यान रखते हुए जल्द ही प्रदेश में गुटके के उत्पादन व बिक्री पर प्रतिबंध लगायें। हालांकि हमें पता है कि उत्पादन पर प्रतिबंध लगाने से हजारों लोग बेरोजगार हो जायेंगे, लेकिन राज्य सरकार कम से कम उनके लिये वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था तो कर ही सकती है। खैर फैसला उन्हें ही लेना है।
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