बिल्डर के बारे में पक्की जानकारी के बाद ही लें गुड़गांव में फ्लैट

शहर में बिल्डरों द्वारा लाईसैंसशुदा कॉलोनियों में किए जा रहे निर्माण पर जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह रोक तब तक लागू रहेगी, जब तक बिल्डर द्वारा निर्माण कार्यों के लिए केवल सीवरेज का रीसाईकल्ड और शोधित पानी प्रयोग में लाए जाने की पुष्टि नहीं की जाती। यह पुष्टि उन्हें हुडा विभाग से करवानी अनिवार्य है। इस संबंध में उपायुक्त द्वारा जिला के 81 बिल्डरों को नोटिस भी जारी कर दिए गए हैं।
ग्राम एवं नगर योजनाकार विभाग के वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव एस एस ढिल्लो, उपायुक्त पी सी मीणा, हुडा प्रशासक डा. प्रवीण कुमार ने हुडा तथा नगर निगम के अधिकारियों के साथ गुडग़ांव के गोल्फ कोर्स एक्सटैंशन रोड़ पर बिल्डरों द्वारा बनाई जा रही लाईसैंसशुदा कॉलोनियों का औचक निरीक्षण किया, जिसमें ज्यादातर जगहों पर निर्माण कार्य बन्द मिला।
ढिल्लो ने उच्च न्यायालय की हिदायतों का हवाला देते हुए कहा कि गुडग़ांव में भूजल के अत्याधिक दोहन से भूजल स्तर गिरता जा रहा है और अब भूजल के निर्माण कार्यों में प्रयोग पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा, टैंकर से भी पानी मंगवाकर उसका प्रयोग निर्माण कार्यों के लिए नहीं किया जा सकता क्योंकि केन्द्रीय भूजल प्राधिकरण द्वारा पूरे गुडग़ांव जिला को अधिसूचित क्षेत्र घोषित किया हुआ है।
ढिल्लो ने कहा कि निर्माण कार्यों के लिए शोधित पानी हुडा तथा नगर निगम के बहरामपुर व धनवापुर के सीवरेज ट्रीटमैंट प्लांटों से प्राप्त किया जा सकता है। नगर निगम तथा हुडा विभाग सीवरेज के पानी का प्राईमरी तथा सैकेंडरी ट्रीटमैंट करके देंगे और टर्सरी अर्थात अंतिम ट्रीटमैंट बिल्डर को स्वयं अपनी साईट पर करवाना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य पुन: शुरू करने से पहले बिल्डर को हुडा विभाग से यह पुष्टि करवानी पड़ेगी कि उक्त बिल्डर द्वारा निर्माण कार्य में केवल सीवरेज का शोधित पानी इस्तेमाल किया जा रहा है और भूजल का प्रयोग निर्माण में नहीं किया जा रहा।
हुडा विभाग यह रिकार्ड रखेगा कि किस बिल्डर को निर्माण के लिए कितने पानी की आवश्यकता है और वह सीवरेज ट्रीटमैंट प्लांट से उतना शोधित पानी ले रहा है अथवा नहीं। एक अनुमान के अनुसार गुडग़ांव में लगे तीन मलशोधक सयंत्रों में प्रतिदिन लगभग 150 एमएलडी पानी शोधित किया जा रहा है। इनमें नगर निगम के धनवापुर सयंत्र से 30 एमएलडी, हुडा के धनवापुर सयंत्र से 68 एमएलडी तथा हुडा के ही बहरामपुर सयंत्र से 50 एमएलडी पानी शोधित हो रहा है।
वित्तायुक्त ने कहा कि अब भी यदि कोई बिल्डर भूजल का प्रयेग निर्माण कार्य के लिए करता पाया गया तो, उसके खिलाफ उच्च न्यायालय की अवमानना की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि बिल्डरों पर नजर रखने के लिए जिला प्रशासन द्वारा 25 टीमों का गठन किया गया है, जो अपने-अपने क्षेत्र में निरीक्षण करती रहेंगी। उपायुक्त पी सी मीणा ने बताया कि इस वर्ष 20 अगस्त तक जिला में 634 बोरवैल सील व खंडित किए गए थे।
इसके बाद चलाई गई सघन मुहिम के दौरान लगभग 190 अवैध बोरवैल सील किए गए। इन सबको मिलाकर अब तक जिला में 824 अवैध बोरवैल सील व खंडित किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि जिला में 81 बिल्डरों को नोटिस भेज दिए गए हैं, जिनमें उन्हें निर्माण कार्य के लिए शोधित पानी की व्यवस्था होने तक कार्य बन्द रखने तथा निर्माण में भूजल का प्रयोग नहीं करने की हिदायत दी गई है। मीणा ने कहा कि अब बिल्डरों के पास केवल एक ही उपाय रह गया है कि वे निर्माण कार्यों में बहरामपुर तथा धनवापुर के मलशोधक सयंत्रों से शोधित पानी का प्रयोग ही कर सकते हैं।












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