मैं अन्ना नहीं अब मैं केजरीवाल हूं
टीम अन्ना के टूटने के बाद यह बात कोई माने चाहे नहीं माने, लेकिन इंडिया अगेंस्ट करप्शन के सैंकड़ों कार्यकर्ताओं ने अब केजरीवाल को अपना नेता मान लिया है। कल तक जो कार्यकर्ता कहते थे, "मैं अन्ना हूं" वही आज कह रहे हैं, "मैं केजरीवाल हूं"। दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन करने, बैरीकेडिंग तोड़कर पीएम आवास तक पहुंचने और संसद भवन के आस-पास की सड़कों पर पुलिस को नाकों चने चबवाने वाले तमाम लोगों ने केजरीवाल के नाम की टोपियां पहन रखी थीं। इन सभी की टोपियों पर लिखा था, "मैं केजरीवाल हूं"।
केजरीवाल के लिये अन्ना सब कुछ
लोगों ने भले ही केजरीवाल को अपना नेता मान लिया हो, लेकिन केजरीवाल खुद अभी भी अन्ना को ही सबकुछ मानते हैं। टोपी से जुड़े सवाल पर केजरीवाल ने कहा कि लोगों ने अन्ना की जगह उनके नाम की टोपियां पहनीं, यह उन्हें अच्छा नहीं लगा। हमारा आंदोलन एक क्रांति का रूप ले चुका है और इसकी प्रेरणा के स्रोत अन्ना हजारे ही होंगे।
कहां रहीं किरण बेदी
जब से टीम अन्ना भंग हुई है, तब से उसके सदस्य एक साथ एक मंच पर कभी नहीं दिखाई दिये। केजरलवाल के लिये एक बड़ी क्रांति का आगाज़ करने वाले इस प्रदर्शन में किरण बेदी नहीं दिखाई दीं और ना ही अन्ना। अन्ना फिलहाल अपने गांव रालेगण सिद्धी में हैं, लेकिन केजरीवाल के इतने बड़े प्रदर्शन पर उनकी एक भी टिप्पणी नहीं आयी। इससे एक सवाल यह भी खड़ा होता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ है, जो अन्ना की जगह लोग केजरीवाल के नारे लगा रहे हैं?
कुल मिलाकर देखा जाये तो इस टोपी से यह जरूर साफ हो गया है कि यदि अन्ना हजारे आंदोलन की कमान छोड़ देते हैं, तो केजरीवाल ही बागडोर संभालेंगे। पढ़ें- केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली में प्रदर्शन।













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