दिल्ली में फ्लैटों की कीमतें दो गुनी ज्यादा, खाली हैं लाखों फ्लैट

EMI will be less but flat cost must be at par
दिल्ली (ब्यूरो)। हाउसिंग सेक्टर में सकारात्मक भूचाल आने की संभावना है। सरकार बैकों को विदेशी कर्ज लेने की अनुमति देने जा रही है। इससे इस देश के लाखों लोगों को अपना मकान का सपना पूरा हो सकेगा। क्योंकि विदेश में लोन पर ब्याज दो फीसदी से ज्यादा नहीं है। अगर वे भारत में चार-पांच फीसदी पर भी लोन दें देश में बहार आ जाएगी। लेकिन इसके साथ जरुरी है कि कृत्रिम तरीके से बढ़ाई गई कीमते वास्तविक दर पर लाई जाएं। आज भी दिल्ली और एनसीआर में कीमते दो गुनी से भी ज्यादा हैं। जिस फ्लैट की कीमत 20 लाख होनी चाहिए उसकी कीमत पचास लाख से ऊपर है।

वित्त मंत्री ने कहा कि सिर्फ मुंबई में पांच लाख मकान खाली हैं। दिल्ली और एनसीआर में भी लाखों मकान खाली हैं। खरीदार नहीं हैं क्योंकि कीमत बहुत ज्यादा है। मकान नहीं बिके तो बिल्डर तबाह हो जाएंगे। इसका एक मात्र समाधान यही है कि मकान की कीमते तो घटें और ब्याज दर भी। ब्याज दर तो घटने का रास्ता साफ हो गया है। लेकिन मकानों की बनावटी कीमतें घटाने की जरुरत है। सरकार इस दिशा में काम करे तो शायद आम आदमी का सपना पूरा हो सकेगा। ऐसे में सरकार ने आईबीए से एक समूह गठित कर मकानों की मांग, अधूरे पड़े मकान और खाली पड़े मकानों पर रिपोर्ट मांगी है। आईबीए की रिपोर्ट आने के बाद ही सरकार कोई फैसला करेगी।

एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ईसीबी) की गाइडलाइंस की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक में सिडबी को छोटे कारोबारियों को लेंडिंग के लिए विदेश से कर्ज जुटाने की इजाजत दी गई है। जाहिर है इस फैसले का भारत के हाउसिंग सेक्टर पर जबरदस्त प्रभाव पड़ेगा। ईएमआई घटने से 15 लाख के आस-पास के मकानों में बहार आ जाएगी। सरकार ने किफायती आवास के लिए विदेशों से लिए गए ऋण को खर्च न करने पर लगने वाले कर को 20 प्रतिशत से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है। यह प्रावधान तीन वर्षों के लिए है। जाहिर है इन फैसलों से सस्ते मकान का सपना आसान दिख रहा है।

यह किसी से छिपा नहीं है कि मंदी के दौर में रियल एस्टेट क्षेत्र भी थम गया है। देश में 53 फीसदी बन रहे या तैयार मकान के लिए खरीदार नहीं मिल रहे हैं। खरीदारों की संख्या बढ़ाने का एक तरीका इसकी कीमतों में कमी हो सकता है। महानगरों में इस समय दो बेडरुम वाले फ्लैटों की कीमत अभी भी 30 लाख से 45 लाख के बीच में हैं। जाहिर ही प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करनेवाला यह कीमत चुकाने की स्थिति में नहीं है। भले ही उसकी सैलेरी उसके लायक है लेकिन नौकरी का भरोसा नहीं है। नौकरियां जा रही हैं। वेतन में कटौती हो रही है।

खरीददारों को आक र्षित करने के लिए छोटी बड़ी सभी रियल एस्टेट कंपनियों ने अपनी कीमतों में कमी भी की है। डीएलएफ ने कई शहरों में उसने प्रॉपर्टी की कीमतों में कमी है, फिर भी आम लोगों के दायरे से बाहर है। दरअसल प्रॉपर्टी की कीमत अभी भी अपनी बाटम लाइन से काफी ऊपरहै । सरकार को इस दिशा में सोचने की जरुरत है कि फ्लैट की कीमत सही हो। बनावटी तरीके से बढ़ाई गई कीमते जब तक वास्तविक कीमत पर नहीं आएगी तब तक कम ब्याज दर भी ज्यादा फायदा नहीं पहुचा सकेगा।

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