बस एक एसएमएस बचाएगा आपको नकली दवाओं से

जब इस विषय में फार्मा स्क्योर कंपनी गुडग़ांव के मार्केटिंग एसोसिएट डॉयरेक्टर आलोक गर्ग से बात की गई तो उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार व इंटरपोल ने यह माना कि बाजार में 20 फिसदी दवा नकली है जो कि मरीज को न तो फायदा पहुंचाती है और न ही नुकसान। उन्होंने बताया कि फार्मा स्क्योर ने एक ऐसा कोड जनरेट किया है जिससे दवा कंपनी अपनी दवाओं पर इस्तमेाल करके डुप्लीकेट दवाओं पर पर रोक लगा सकती है। अभी तक लूपिन, यूनिकेम, रेनबैक्सी फार्मा ने यह कोड आरंभ किया है व कुल 10 नामी दवा कंपनी ने उनसे यूनिक कोड लेना शुरू कर दिया है।
क्या है यूनिक कोड
दवाई के पीछे 8-9 अंकों का एक नंबर होगा जिसे 9901099010 पर एसएमएस करना होगा, जिसके 10 सैकेंड बाद आपको दवा कंपनी एसएमएस से पता देगी कि दवा असली है या नकली। दवा असली होने पर उसका बैच नंबर और दवा कंपनी का नाम उपभोक्ता को एसएमएस से मिलेगा। इसका मिलान उपभोक्ता दवा कंपनी की स्ट्रिप या बोतल या फिर इंजेक्शन पर छपे बैच नंबर से कर सकेगा। यदि उपभोक्ता खरीदी गई दवा के बैच नंबर, कंपनी और एमएमएस से प्राप्त होने वाले बैच नंबर, कंपनी में फर्क पाता है तो वह दवा नकली है जो आपके स्वास्थ्य के लिए नुकसान दायक है।
सरकार का नोटिफिकेशन आना बाकी है, उसके बाद सभी असली दवाओं पर यह कोड अंकित होगा। जिससे उपभोक्ता अपनी दवा की पहचान एसएमएस से कर सकेगा। उन्होंने कहा कि यह सेवा विदेशों में पहले ही शुरू हो चुकी है व भारत में हम पिछले डेढ़ वर्ष से साफ्टवेयर व कोड जनरेट कर रहे हैं, जिसका असर मार्केट में देखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार का नेाटिफिकेशन आने पर सभी दवा कंपनियों को कोड जनरेट करना होगा।












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