मुंबई रैली में पहले से ही मौजूद का हिंसा का सामान

Assam politicians abetted Mumbai violence
दिल्ली (ब्यूरो)। असम की घटना को लेकर मुंबई में हिंसा प्रायोजित थी। मुंबई पुलिस ने गृहमंत्रालय को जो रिपोर्ट भेजी है उसमें असम के एक अल्पसंख्यक समुदाय के एक नेता की भूमिका मानी जा रहा है जिसने न केवल भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया बल्कि बाहर से उपद्रवियों को लाने में भी सहयोग किया। हालांकि पुलिस ने उसका नाम बताने से इंकार कर दिया है। वहीं पुलिस मीडिया द्वारा लिए गए फुटेज को भी खंगाल रही है औऱ उसे आशा है कि इस फुटेज में उसे कोई न कोई बड़ा सुराग हाथ जरूर लग जाएगा।

एक सूत्र ने बताया कि आजाद मैदान में जो भीड़ आई थी वह पहले से ही हथियारों से लैस थी और उसे गाड़ियों में भर कर लाया गया था। माना जा रहा है कि उन्हें पहले से ही इस बात के लिए तैयार करके लाया गया था। इधर, दिल्ली में आज महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण मुंबई में हुई हिंसा को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिले। इस दौरान उन्होंने हिंसा के कारणों पर प्रकाश डाला। उनकी इस मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं।

मुंबई में हिंसक प्रदर्शन सुनियोजित था। मुंबई पुलिस सहित विभिन्न जांच एजेंसियां इसके पीछे संलिप्त लोगों और गुटों की पड़ताल कर रही है। वहीं मुंबई जैसा अशांत प्रदर्शन और जगहों पर नहीं हो इसके लिए गृह मंत्रालय ने भी सभी राज्यों को सतर्क कर दिया है। गृह मंत्रालय की ओर से राज्यों को लिखी चिट्ठी में कहा गया है कि वह सक्रिय अल्पसंख्यक गुटों से बातचीत कर उन्हें इस तरह के प्रदर्शन से रोकें।

असम और म्यांमार में मुसलिम समुदाय पर हो रहे हमलों पर विरोध प्रकट करने के नाम पर मुंबई के आजाद मैदान में शनिवार को हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया। रैली के दौरान भीड़ हिंसक हो गई और पुलिस को भीड़ को तितर बितर करने के लिए हवा में गोली चलानी पड़ी। इस हिंसा में दो लोग मारे गए और करीब साठ लोग घायल हुए।

गृह मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि जो रिपोर्ट हमें मिली है उसमें कहा गया है कि प्रदर्शन में शामिल कुछ लोग पहले से ही डंडा और आगजनी का सामान साथ लेकर लाए थे। सूत्र का कहना है कि जो लोग हिंसा में शामिल थे, उन्हें बसों में भरकर लाया गया था। ये सभी लाठियों, लोहे की छड़ों से लैस थे। इस बात के पूरे संकेत मिले हैं कि कुछ लोग रैली में केवल अशांति फैलाने के लिए ही शामिल हुए थे।

गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ की जा रही है। मुंबई के पुलिस आयुक्त अरुप पटनायक ने बताया कि आगजनी और हिंसा में शामिल अन्य लोगों की पहचान के लिए छत्रपति शिवाजी टर्मिनल एवं मुंबई महानगरपालिका मुख्यालय के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को बारीकी से देखा जा रहा है। इस संबंध में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं प्रेस फोटोग्राफरों द्वारा ली गई तस्वीरों को भी देखा जाएगा। हिंसा के बाद 100 से ज्यादा लोग अपनी मोटरसाइकिलें आजाद मैदान के बाहर छोड़कर भाग गए थे।

अब पुलिस हिंसा की जांच के लिए इन वाहनों के मालिकों से भी पूछताछ कर रही है। पुलिस द्वारा इस प्रकार की जा रही पूछताछ से अब महानगर के मुस्लिम नेताओं में नाराजगी भी देखी जा रही है। समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र अध्यक्ष अबू आजमी ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में जांच के दौरान निर्दोष लोगों को परेशान किए जाने पर नाराजगी जाहिर की। पुलिस आयुक्त पटनायक का कहना है कि पुलिस द्वारा किसी भी निर्दोष व्यक्ति को परेशान नहीं किया जा रहा है।

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