नीतीश कुमार को पटाने की तैयारी में बिहार कांग्रेस

सूत्र बता रहे है कि इस कड़ी में सबसे पहले वह बिहार और कर्नाटक पर नजर लगाए हुए है क्योंकि इन दोनों जगहों पर भाजपा अपने अंदरद्वंद्व से जूझ रही है। यह ओर बिहार में जहां भाजपा के सहयोगी नीतीश कुमार प्रधानमंत्री के पद को लेकर भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं वहीं कर्नाटक में बीएस येद्दयुरप्पा अपनी ही पार्टी में उलटफेर करते हुए नजर आ रहे है।
इसलिए कांग्रेस के प्रबंधक इन दोनों नेताओं को अपने पक्ष में करके न केवल भाजपा को कमजोर करना चाहते हैं बल्कि वह अपने सहयोगियों की संख्या में भी वृद्धि के फिराक में हैं। हालांकि बिहार में उसे सबसे बड़ा संकट पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की यूपीए में मौजूदगी है जिन्होंने न केवल राष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का आंख बंद कर समर्थन किया बल्कि अन्य दलों को भी मनाने में कामयाब रहे।
यही कारण है कि कांग्रेस के कुछ नेता सितंबर में होने जा रहे केंद्रीय मंत्रिमंडल में उनको जगह दिलाने के लिए प्रयास में लगे हुए हैं। वैसे चर्चा है कि लालू यादव ने भी सोनिया से अपनी सिफारिश लगाई है कि उन्हें भी कैबिनेट में शामिल कर लिया जाय जिससे आने वाले चुनाव में उन्हें फायदा मिल सके। कांग्रेस को फायदा मिल सके। पर कांग्रेस के रणनीति कार बिहार को लेकर एक बार फिर अपनी नई रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
रणनीतिकारों को मानना है कि लालू से ज्यादा फायदा नीतीश को अपने पक्ष में होगा। क्योंकि बिहार के लोगों में नीतीश की साफ सुथरी छवि भी है औऱ इस समय वे भाजपा के निशाने पर भी हैं इसलिए संभव है कि वे राष्ट्रपति चुनाव की तरह ही 2014 में उनकी पार्टी का समर्थन कर दें इससे बिहार में कांग्रेस की खोई जमीन प्राप्त करने में जहां जगह मिलेगी वहीं एक समझदार सहयोगी भी।
आपको बता दें कि इस समय नीतीश प्रधानमंत्री पद को लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से नाराज है। उस पर झारखंड के एक नेता यशवंत सिन्हा के इस बयान ने उन्हें और भड़का दिया है कि वे जातिवादी नेता है। इन्हीं सब को देखते हुए कांग्रेस के प्रबंधकों ने अब नीतीश कुमार पर अपनी नजरें टिका दी हैं।












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