बाबा रामदेव के आंदोलन में हुआ सिर्फ शक्ति प्रदर्शन
नई दिल्ली। योग गुरु बाबा रामदेव रामलीला मैदान से दोपहर एक बजे निकले और जैसे ही संसद की ओर बढ़े पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। उनके साथ-साथ पुलिस ने हजारों समर्थकों को भी हिरासत में लेकर बसों में भरना शुरू कर दिया। बाबा रामदेव को बवाना ले जाना है, लेकिन सड़क पर इतनी भीड़ है कि उनका काफिला काफी धीमी गति से चल रहा है। जैसे ही वो बवाना पहुंचेंगे, उनका आंदोलन गिरफ्तारी के साथ समाप्त हो जायेगा। पढ़ें- बाबा से जुड़ी खबरें।
सच पूछिए तो दिल्ली में पिछले पांच दिनों में हुई इस रामदेव लीला में बाबा ने अगर कुछ दिखाया है तो वो है शक्ति प्रदर्शन। अगर बाबा रामदेव यह सोचते हैं कि उनका यह आंदोलन सफल रहा, तो वह उनकी गलत फहमी होगी, क्योंकि न तो सरकार के कान में जूं रेंगी न प्रशासन को कोई फर्क पड़ा, हां दिल्लीवासियों को जरूर फर्क पड़ा, क्योंकि इस भीड़ के चक्कर में दिल्ली के रामलीला मैदान से दरियागंज होते हुए बवाना तक का पूरा रास्ता जाम हो गया है।

मजेदार बात यह है कि इस चलते काफिले में जिस-जिस पत्रकार ने बाबा रामदेव से जितने भी सवाल पूछे, उनका जवाब एक रहा। उन्होंने हर पत्रकार से एक ही बात कही, "यह आंदोलन की शुरुआत है। आंदोलन अभी और बढ़ेगा। सरकार को झुकना ही होगा। काले धन पर कार्रवाई करनी ही होगी।" पत्रकार जब ज्यादा पूछते तो बाबा एक ही बात दोहराते, "देश की जीडीपी 12 फीसदी होनी चाहिये थी वो 4 फीसदी पर अटकी हुई है। देश में भ्रष्टाचार व्याप्त है, आम आदमी जागरूक हो रहा है....।"
खैर बाबा के भाषण भले ही दमदार नहीं दिख रहे हैं, लेकिन यहां मौजूद हुजूम जरूर दमदार है। हम यही कहना चाहेंगे कि अगर हजारों की संख्या में पहुंचे लोग अगर सीधे तौर पर बाबा रामदेव के लिये यहां आये हैं, तो यह केंद्र सरकार समेत कई राजनीतिक पार्टियों के लिये खतरे की घंटी है। क्योंकि बाबा ने अगर 2014 में अपनी पार्टी बना ली तो अच्छे-अच्छों की छुट्टी हो जायेगी। लेकिन अगर इन लोगों में भाजपा के कार्यकर्ता भी शामिल हैं, तो बाबा को इतनी मुसीबतें झेलने के बाद भी कोई फायदा नहीं मिलने वाला और ऐसी स्थिति में काला धन वापस लाना तो दूर की बात है, उनकी छोटी-छोटी मांगें भी सरकार नहीं मानने वाली। आगे पढ़ें- बाबा रामदेव को लिया गया हिरासत में।












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