हंगामे के दौरान संसद मानसून सत्र 12 बजे तक स्‍थगित

Monsoon Session of Parliament begins today‎
नयी दिल्ली। आज (बुधवार) संसद का मानसून सत्र शुरू होते ही हंगामे की भेट चढ़ गया। शुरू होने के कुछ ही देर बाद लोकसभा स्‍पीकर मीरा कुमार के कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्‍थगित कर दी। ऐसा पहले ही संभावना जताई जा रही थी कि विपक्ष मंद पड़ती अर्थव्यवस्था, असम में जातीय हिंसा, देश में सूखे और बाढ की स्थिति, खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश जैसे मामलों को लेकर जमकर सरकार पर बरसेगा। संसद का पहले ही दिन सरकार को बचाव की मुद्रा में लाने की रणनीति के तहत भाजपा ने असम का मुद्दा उठाने की घोषणा की थी।

इसके अलावा स्पेक्ट्रम, कोयला ब्लाक आवंटन और एयरसेल-मेक्सिस सौदे जैसे कथित घोटालों पर भी विपक्ष सरकार को घेरने का प्रयास करेगा। तमिलनाडु एक्सप्रेस ट्रेन में लगी आग सहित पिछले कुछ दिनों में बढ़ती रेल दुर्घटनाओं के मामलों को उठा कर संप्रग की दुखती रग को दबाने का भी प्रयास होगा। रेल मंत्रालय ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के पास है जो कांग्रेस का सहयोगी दल है।

इस साल देश के अधिकतर हिस्से में मानसून की कमी का विषय भी संसद में जोर शोर से उठेगा। विपक्ष का आरोप है कि वर्षा नहीं होने से सूखे की स्थिति उत्पन्न हो गई है और सरकार की उससे निपटने की कोई तैयारी नहीं है। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि देश बड़े आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।

विश्व में भारतीय अर्थव्यवस्था की रेटिंग घटाए जाने, रूपए का अवमूल्यन होने और इनकी वजह से उत्पन्न समस्याओं पर हम संसद में गंभीर चर्चा और सरकार के ईमानदार जवाब की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि इसके अलावा खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दिए जाने की सरकार की मंशा के बारे में उनकी पार्टी स्पष्टीकरण चाहेगी। सरकार से उन्होंने मांग की कि इस मुद्दे पर या तो वह चर्चा कराए अथवा सदन में आश्वासन दे कि खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को अनुमति नहीं दी जाएगी।

प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति बन जाने से लोकसभा में अब उनकी जगह सुशील कुमार शिंदे सदन के नेता के रूप में दिखेंगे। माकपा के गुरूदास दासगुप्ता ने कहा कि संसद के इस सत्र में हमारी पहली प्राथमिकता अर्थव्यवस्था संकट पर चर्चा कराना होगी, क्योंकि सरकार इस सचाई पर पर्दा डालने को प्रयासरत है। एफडीआई मामले में सरकार पर साफ रूख नहीं अपनाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि संसद सरकार की कोई नाचती गुडि़या नहीं है।

उसे विपक्ष की मांगों को गंभीरता से लेना चाहिए। संप्रग के घटक दल तृणमूल कांग्रेस ने भी सरकार को चेतावनी दी कि वह एफडीआई और पेंशन विधेयक जैसी जन विरोधी नीतियों को आगे बढ़ाने से बाज़ आए। सात सितंबर तक चलने वाले मानसून सत्र में पुणे विस्फोट, असम के जातीय दंगे, रेल दुर्घटनाओं, बिजली ग्रिड के ठप होने, अमरनाथ यात्रा में बड़ी संख्या में श्रृद्धालुओं के निधन और मारूति संयत्र में हिंसा जैसे विषयों पर भी विपक्ष सरकार को जोरदार ढंग से घेरने का प्रयास करेगा।

संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने बताया कि मानसून सत्र में 31 विधेयक विचार के लिए रखे जाएंगे, लेकिन लोकपाल विधेयक पर अभी अनिश्चितता बनी हुई है। इस सत्र के लिए सूचीबद्ध मुख्य विधेयकों में महिला आरक्षण विधेयक, वायदा अनुबंधन विधेयक और विसलब्लोअर विधेयक शामिल हैं। पिछले 42 साल से लंबित बहुचर्चित लोकपाल विधेयक के इस सत्र में पारित होने की संभावना नहीं है।

बंसल ने कहा कि इस विधेयक की अभी प्रवर समिति में समीक्षा पूरी नहीं हो पाने के कारण इसे इस सत्र के लिए अभी सूचीबद्ध नहीं किया गया है। इस विधेयक को लोकसभा से मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन राज्यसभा से इसका पारित होना अभी बाकी है।

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