गुजरात की रणभूमि में दांव पर होगा केशुभाई, मोदी का भविष्य

यदि भाजपा पुनः सरकार बनाने में सफल हो जाती है तो राष्ट्रीय राजनीति में मोदी की जगह पक्की हो जाएगी नहीं तो नरेंद्र मोदी भी सियासी स्यापा का शिकार हो जाएंगे वहीं केशुभाई पटेल की राजनीतिक जमीन भी इस चुनाव में फाइनल हो जाएगा। यदि वे इस चुनाव में सफल हो जाते हैं तो उनकी राजनीति नया करवट लेगी पर ऐसा नहीं हुआ तो केशुभाई का गुजरात से केशु युग अंत हो जाएगा।
गुजरात में विधानसभा की तैयारियां लगभग शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी संग रार के बाद पार्टी से अलग हुए केशुभाई पटेल ने आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी जीत का पताका फहराने के लिए कोशिशें शुरू कर दी हैं। वे लगातार बैठकें कर रहे हैं। एक सूत्र ने बताया कि केशुभाई पटेल इस चुनाव में अपने को मुख्यमंत्री के रूप में पेश करेंगे।
यानी वे सीधे सीधे नरेंद्र मोदी को चुनौती देंगे। सूत्रों का कहना है कि उनको लगता है कि सीधे सीधे चुनाव में होने से उनके दल को फायदा होगा और गुजरात में उनके उम्मीदवारों को नहीं बल्कि लोग उनको देखकर वोट करेंगे। इसलिए चुनाव से पहले ही वे अपने को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार के रूप में प्रचारित कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इससे वह न केवल भाजपा के उन असंतुष्ठों को न्योता दे रहे हैं बल्कि वे चाहते हैं कि किसी भी तरह से मोदी से नाखुश गुट उनका समर्थन करें।
गौरतलब है कि गुजरात में केशुभाई पटेल ने 182 सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बनाया है और उनको लगता है कि गुजरात के सौराष्ट्र, कच्छ और दक्षिण गुजरात यानी सूरत में भी जहां पटेल आबादी ज्यादा है वहां वे भाजपा और कांग्रेस को कड़ी टक्कर देंगे। 83 वर्षीय पटेल को पटेल समुदाय का एक ताकतवर नेता माना जाता है और पटेल समुदाय का भाजपा को आंख बंद समर्थन है ऐसे में पटेल समुदाय का भाजपा से खिसकना निश्चित ही भाजपा को चिंता में डाल रहा है। पर मोदी का व्यक्तित्व जिस प्रकार से आवाम के सामने आया है उससे मोदी की जीत भी लगभग पक्की मानी जा रही है पर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व केशुभाई के दलबदल से काफी परेशान है।












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