शराब, ड्रग्‍स के चक्‍कर में यौन संबंध बना रहे टीनेजर्स

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बेंगलूरु। पश्चिमी सभ्‍यता की ओर तेजी से भाग रहे भात को यह खबर पढ़कर जरूर सतर्क हो जाना चाहिये। यह खबर है ब्रिटेन की जहां के टीनेजर्स शराब और ड्रग्‍स के चक्‍कर में यौन संबंध बना रहे हैं। ब्रिटेन की संस्‍था यूबीसी के एक अध्‍ययन के मुताबिक ब्रिटिश कोलंबिया के 48 फीसदी बच्‍चे स्‍कूली जीवन में यौन संबंध स्‍थापित कर चुके थे। उससे भी खतरनाक तथ्‍य यह कि उनमें 98 फीसदी बच्‍चे ड्रग्‍स के चक्‍कर में सेक्‍स करते हैं। यही नहीं ये बच्‍चे पढ़ाई भी करते हैं और स्‍कूल भी जाते हैं और लौट कर घर पर भी रहते हैं।

यह अध्‍ययन असल में एक चेतावनी है पूरे विश्‍व के लिये कि आज के बच्‍चे कहां जा रहे हैं। कैनेडा के एक जर्नल ह्यूमन सेक्‍सुआलिटी में प्रकाशित यह सर्वेक्षण ढाई हजार छात्र-छात्राओं पर किया गया। इसमें कक्षा 7 से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं को रखा गया और उनसे प्रश्‍न किये गये। नाम न बताने की शर्त पर किये गये सवालों में यह तथ्‍य उजागर हुए। इस रिपोर्ट को ब्रिटिश सरकार ने गंभीरता से लेते हुए इस प्रवृत्ति को रोकने के लिये ठोस कदम उठाने के निर्देश जारी कर दिये हैं।

खैर यह तो रही ब्रिटेन की बात, अगर इसी तथ्‍य को भारत के परिप्रेक्ष्‍य में देखा जाये तो स्थिति कमोबेश बहुत अच्‍छी नहीं है। यहां भी तेजी से बढ़ता मॉल कल्‍चर और पश्चिमी सभ्‍यता की ओर बढ़ रहे टीनेजर्स यौन संबंधों के पीछे भाग रहे हैं। खैर यहां अभी यह नौबत नहीं आयी है कि बच्‍चे नशे के लिये यह सब करें।

वनइंडिया ने इस मुद्दे को उठाया इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय मुक्‍त विश्‍वविद्यालय के काउंसिलर एवं लखनऊ के श्री जयनारायण पीजी कॉलेज के प्रवक्‍ता डा. आलोक चांटिया का कहना है कि हमारे देश में ऐसी बातें हाई क्‍लास और मीडियम क्‍लास के लोगों के बीच खतरे की घंटी बजा चुकी हैं, क्‍योंकि हाई क्‍लास परिवारों में ओपन सेक्‍स को गलत नहीं माना जाता। लेकिन ऐसे में लड़के-लड़कियां अकेले मिलने पर भावनाओं में बह जाते हैं।

वहीं मीडियम क्‍लास में मॉल संस्‍कृति में पड़ने के बाद जिन बच्‍चों के खर्च की फेहरिस्‍त लंबी हो जाती है, उनके बीच ऐसे खतरे ज्‍यादा होते हैं। क्‍योंकि उन्‍हें हाई लेवल के खर्च के लिये जब घर से पैसे नहीं मिलते तब वो गलत तरीके से पैसा कमाने की सोचने लगते हैं। ऐसे में धनाड्य परिवार के लोग उनका गलत फायदा उठाने में जरा भी पीछे नहीं हटते।

डा. चांटियां का कहना है कि टीनेज ऐसी उम्र होती है, जिसमें वो सब काम करने का मन करता है, जिसे करने से रोका जाता है। अलग अनुभव पाने के लिये, उम्र से पहले कैसा लगता है यह जानने के लिये, मम्‍मी पापा के पीछे प्‍यार करने, आदि में कैसा लगता है यह उत्‍सुकता टीनेजर्स में हमेशा बनी रहती है और सेक्‍स के मकड़जाल से इसे दूर रखने के लिये बचपन से ही नैतिक मूल्‍यों का भरना जरूरी होता है।

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