मोदी से टसल रखने वाले संजय जोशी की होगी बैकडोर एंट्री

गुजरात भाजपा के वरिष्ठ नेता केशुभाई पटेल की पार्टी से विदाई के बाद संजय जोशी को भाजपा में लाए जाने की कवायद तेज हो गई है। क्योंकि भाजपा को लगने लगा है कि यदि संजय जोशी ने भी कहीं केशुभाई पटेल की तरह अपना दल बनाने या फिर केशुभाई के साथ हाथ मिला लिया तो भाजपा के लिए गुजरात में वापसी मुश्किल हो जाएगी।
वैसे भी केशुभाई की पटेल बिरादरी में अच्छी पकड़ है और गुजरात में पटेलों की भी बहुतायत है। इसलिए संजय जोशी को फिर से भाजपा में लाने के लिए कुछ नेता सक्रिय हो गए हैं। वैसे भी भाजपा में आने के लिए खुद संजय जोशी ने ही पहल की है और उन्होंने दिल्ली में भाजपा के लिए प्राथमिक सदस्यता के लिए आवेदन किया है।
हालांकि पार्टी ने इस मामले में अब तक कोई टिप्पणी नहीं की। लेकिन संजय जोशी ने कहा कि मैंने सदस्यता के लिए कोई फार्म नहीं भरा है और किसी ने यह शरारत की है। वैसे एक स्लिप सामने आई है जिसमें संजय जोशी का नाम है।
सूत्रों के अनुसार जोशी ने सदस्यता का जो फार्म भरा है, उस पर उन्होंने 111 नॉर्थ एवेन्यू का पता दिया है। सदस्यता के लिए जो पर्ची काटी गई है, उसका नंबर 18792 है और यह पर्ची नितिन सरदारे ने काटी है। अब देखना है कि क्या भाजपा उनकी प्राथमिक सदस्यता को स्वीकार करती है कि नहीं। यदि स्वीकार नहीं करती है तो भाजपा को गुजरात में तो नुकसान होगा ही राष्ट्रीय राजनीति में भी उसे कम नुकसान होगा।
सूत्र बता रहे हैं कि संजय जोशी भी अपने को भाजपा से अलग नहीं करना चाहते। वे चाहते हैं कि जिस रसूख से वे भाजपा में थे उसी रसूख से उनकी वापसी हो जाए। और संभवतः सियासी समीकरण भी उनके पक्ष में हैं औऱ संभव है कि नरेंद्र मोदी भी केशुभाई पटेल के भाजपा छोड़ने के बाद संजय जोशी पर कुछ नरम रुख अपनाएं औऱ चुनाव में संजय जोशी के साथ मतभेदों को और उजागर न करें।
वैसे भाजपा और नरेंद्र मोदी दोनों के लिए फायदा इसी बात में होता कि संजय जोशी की वापसी एक बार फिर भाजपा में होती और गुजरात में चुनाव इस संदेश के साथ लड़ा जाता कि संजय जोशी भाजपा के ही एक अंग हैं।
आपको बता दें कि मोदी की नाराजगी और दबाव के चलते इस साल मई में मुंबई की कार्यकारिणी से ठीक पहले पार्टी ने खुद ही संजय भाई जोशी से इस्तीफा ले लिया था। हालांकि पार्टी की ओर से यही कहा गया था कि जोशी ने खुद ही पार्टी को असहज स्थिति से बचाने के लिए इस्तीफा दिया है। बाद में पता चला कि संजय जोशी से इस्तीफा देने के लिए कहा गया था।
इसके बाद दिल्ली और गुजरात की सड़कों पर संजय जोशी बनाम नरेन्द्र मोदी का पोस्टर युद्ध नजर आया। इस पोस्टर युद्ध के बाद एक बार फिर मोदी ने दबाव बनाया और अंतत: पार्टी को ऐलान करना पड़ा कि संजय जोशी को पार्टी के सभी कार्यों से मुक्त कर दिया गया है। हालांकि संजय जोशी इसके बाद भी कहते रहे कि वह पार्टी में हैं।












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