राधे मां महामंडलेश्वर पद से बर्खास्त
दिल्ली (ब्यूरो)। महामंडलेश्वर पद से राधे मां को दशनाम जूना अखाड़े ने निलंबित कर दिया है साथ ही उन जांच बैठा दी है और कहा है कि वे जांच पूरी होने तक महामंडलेश्वर पदनाम का प्रयोग न करें। जूना अखाड़े ने राधे मां को महामंडलेश्वर बनाने के बाद उठे विवाद को देखते हुए पूरे मामले की जांच के लिए 11 संतों की एक कमेटी बनाई है। कमेटी राधे मां की गतिविधियों की जांच करेगी। कमेटी को 15 दिन से तीन महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट देनी है। अखाड़े ने साथ ही राधे को मां को चेतावनी भी दी थी कि जांच में उनका आचरण सनातन धर्म के विरुद्ध पाए जाने पर पदवी छीन ली जाएगी और अखाड़े से बहिष्कृत कर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि बहुचर्चित राधे मां को कुछ दिनों पहले ही आनन फानन में महामंडलेश्वर घोषित कर दिया गया था औऱ कहा गया था कि अखाड़ा के परंपरा के अनुसार उन्हें कुंभ में न सिर्फ अधिक महत्व मिलेगा, बल्कि वे अपने शिष्यों के साथ हाथी-रथ पर सवारी भी करेंगी। संत समाज के साथ कुंभ के पवित्र स्नान का मौका भी उन्हें मिलेगा। सूत्रों ने बताया कि जूना अखाड़े अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्री महंत हरिगिरि की अगुवाई में कई प्रमुख संतों की मौजूदगी में उन्हें महामंडलेश्वर बनाया गया था। प्रसिद्ध संत और जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि ने मंत्रोच्चारण के बीच उन्हें दंड प्रदान कर महामंडलेश्वर की पदवी प्रदान की थी।
महामंडलेश्वर का महत्व पद अखाड़ा परंपरा में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके ऊपर सिर्फ आचार्य महामंडलेश्वर ही होते हैं। धार्मिक आयोजनों में महामंडलेश्वर को उसकी पूरी गरिमा के साथ महत्व दिया जाता है। आपको बात दें कि राधे मां युवा संत राधे मां पहली बार टीवी चैनलों की सुर्खियां बटोरकर चर्चित हुईं। देश के अधिकांश हिस्सों में उनके बारे में टीवी चैनलों से ही जानकारी हुई। ऊंची पहुंच रखने वाले उनके भक्तों की सूची काफी लंबी है। विदेशों में भी उनके भक्तों की संख्या अच्छी- खासी है। पिछले दिनों उनकी कुल संपत्ति एक हजार करोड़ से अधिक की आंकी गई थी।












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