लापता होने के 5 घंटे बाद मिले पूर्व आरएसएस प्रमुख

माना जाता है कि वह स्मृतिलोप (डिमेंसिया) से पीडि़त हैं। इससे पहले उनके भाई रमेश ने शिकायत दर्ज कराई थी कि सुदर्शन गायब हो गए हैं। इसके बाद पुलिस और संघ के स्वयंसेवकों ने उनकी तलाश शुरू कर दी थी। संघ ने भी कहा था कि सुदर्शन लापता हैं। कहा गया था कि वह सुबह करीब 5:20 बजे सैर पर निकले थे, लेकिन लौटे नहीं। वह बीते कुछ दिनों से अपने भाई के यहां रह रहे हैं। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने सुदर्शन की तलाश के लिए 20 दलों का गठन किया। तलाशी अभियान में संघ के स्वयंसेवक भी शामिल हो गए थे।
कर्नाटक के मंडया जिले के कुपल्ली गांव के निवासी सुदर्शन छह दशक तक संघ के प्रचारक रहे। वह साल 2000 में संघ के सरसंघचालक बने और 2009 तक इस पद पर रहे। इस पद से हटने के बाद से वह भोपाल में रह रहे हैं। इससे पहले मध्य प्रदेश के गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक से सुदर्शन को तलाश करने के प्रयासों के बारे में बात की थी। गुप्ता ने भोपाल में कहा कि लापता होने के समय दो गार्ड उनके साथ नहीं थे। वैसे अक्सर ये उनके साथ होते हैं। उनके टहलने के लिए निकलने के वक्त दोनों गार्ड संघ के स्थानीय दफ्तर में मौजूद थे।
लापता होने के पांच घंटे बाद सुदर्शन एक मकान में पाए गए। मैसूर के पुलिस आयुक्त केएल सुधीर ने बताया कि 81 साल सुदर्शन रास्ता भूल गए थे और बाद में पुलिस ने उन्हें एक मकान में पाया। वह उस स्थान से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर मिले, जहां ठहरे हुए हैं। माना जाता है कि वह स्मृतिलोप (डिमेंसिया) से पीडि़त हैं। मकान में रहने वाले अश्वथ ने संवाददाताओं से कहा कि थकान होने के कारण सुदर्शन उनसे पीने के लिए पानी मांगने आए थे। उन्होंने कहा, सुदर्शन की उम्र को देखते हुए मेरी मां ने उन्हें अंदर बुलाया और पानी दिया।
वह मेरे घर में करीब एक घंटे तक रहे और हम नहीं जानते थे कि वह संघ के पूर्व संघसरचालक हैं। अश्वथ ने कहा कि टीवी चैनलों पर सुदर्शन के लापता होने की खबर देखने के बाद हमने सुदर्शन को पहचाना। इसके तत्काल बाद पुलिस को सूचना दी गई। बाद में तीन पुलिसकर्मी मेरे घर पहुंचे। इससे पहले उनके भाई रमेश ने शिकायत दर्ज कराई कि सुदर्शन गायब हो गए हैं जिसके बाद पुलिस और संघ के स्वयंसेवकों ने उनकी तलाश शुरू की।












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