हरियाणा ने नहीं ली थी फालतू बिजली- निगम

ग्रिड फेल होने के समय उत्तरी क्षेत्र के सभी राज्यों का कुल लोड लगभग 31726 मैगावाट था, जिसमें सभी उत्तरी राज्यों का नेट ऑवरड्रावल 1573 मैगावाट की सीमा में था, जो लगभग 4.8 प्रतिशत होता है। यह पूरी तरह से सीमा के भीतर है और इसी अवधि के दौरान बहुत ही उचित फ्रीक्वेंसी डाटा द्वारा इसकी पुष्टि भी हुई है। यदि राज्यों द्वारा इस अवधि के दौरान विशेष रूप से ऑवरड्रावल किया जा रहा होता, तो फ्रीक्वेंसी प्रोफाइल अत्यधिक खराब होती।
इसलिए कुछ एजेन्सियों का तर्क है कि घटक राज्यों के ऑवरड्रावल के कारण ग्रिड फेल हुआ, कहना ठीक नहीं है। वास्तव में अतीत में ऑवरलोडिंग की स्थिति 31 जुलाई 2012 को पाई गई स्थिति से बहुत गम्भीर थी। उत्तरी क्षेत्र लोड डिस्पेच सैंटर (एनआरएलडीसी) ने संबंधित राज्यों को अपना लोड घटाने के लिए ए, बी, सी की श्रेणी में उल्लंघन संदेश दिये और सम्भव: यही ग्रिड फेल होने का परिणाम है, परन्तु 31 जुलाई 2012 को हरियाणा राज्य लोड डिस्पेच सैंटर को ऐसा कोई संदेश नहीं दिया गया।
वास्तव में अतीत फ्रीक्वेंसी विभिन्न अवसरों पर 48.9 से 50.5 हर्टज की रेंज में हैं। यह हैरानी की बात है कि जब फ्रीक्वेंसी लगभग 50 हर्टज थी, तो कल ग्रिड फेल हो गया। इसलिए ग्रिड फेल होने का कारण किसी दूसरी जगह पर है और चिन्हित किये जाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि मई, जून और जुलाई महीनों के लिए हरियाणा बिजली निगमों का ऑवरड्रावल उसकी कुल खपत का 8.09 प्रतिशत की सीमा में है।












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