ग्रीनलैंड में बर्फ पिघली, 50 साल के भीतर डूब सकते हैं अंडमान निकोबार
दिल्ली (ब्यूरो)। सारी दुनिया के लिए खतरनाक खबर है उत्तरी ध्रुव के सबसे नजदीकी भूखंड ग्रीनलैंड का लगभग पूरा हिस्सा पिघल गया है। इससे आशंका है कि समुद्र का जलस्तर न बढ़ जाए। इस खबर से मालदीव में दहशत फैल गई है। समुद्र का जल स्तर बढ़ा तो सबसे पहले मालदीव ही दुनिया के नक्शे से खत्म होगा। भारत में मुंबई ही नहीं, कोलकाता और बांग्लादेश में ढाका के तटीय इलाकों में भारी तबाही होगी। लेकिन अब तो लग रहा है कि यह सब 50 साल के अंदर ही होने वाला है।
ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त देश है। यह आर्कटिक और अटलांटिक महासागर के बीच कनाडा आर्कटिक द्वीप समूह के पूर्व में स्थित है। 1979 में डेनमार्क ने ग्रीनलैंड को स्वशासन दे दिया। इसके साथ ही डैनिश शाही सरकार केवल विदेशी मामलों, सुरक्षा और आर्थिक नीति तक ही सीमित रह गई। ग्रीनलैंड क्षेत्रफल के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, जो अपने आप में एक महाद्वीप नहीं है। यहां नाममात्र के लोग रहते हैं।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के सोन न्गीम में कहा कि ग्रीनलैंड पर बर्फ की परत को नापने के लिए तीन सैटेलाइटों से डाटा लिए गए और इनसे पता चला कि बर्फ की परत का 97 प्रतिशत मध्य जुलाई के दौरान पिघल गया। यह नतीजे भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो के ओशनसैट उपग्रह से लिए गए थे। ग्रीनलैंड के सैटेलाइट मानचित्रों से पता चला कि आठ जुलाई तक बर्फीली परत का 40 प्रतिशत हिस्सा गायब हो चुका था और कुछ ही दिनों बाद 97 प्रतिशत बर्फ की परत पानी में बदल गई।
वैज्ञानिकों को डर है कि ग्रीनलैंड में इतने बर्फ के पिघलने से समुद्री जलस्तर बढ़ जाएगा। हालांकि 1889 में ऐसा हुआ था और इसके बाद 2012 में जाकर ऐसा हुआ है। इससे पहले साल 2010 में 250 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल का एक हिमशैल इसी ग्लेशियर से टूटकर अलग हो गया था। वैज्ञानिकों का कहना है गर्म तापमान की वजह है ग्रीनलैंड की बर्फ लगातार कम होती जा रही है। ग्रीनलैंड में बर्फ पिघलने की खबर से मालदीव में दहशत फैल गई है।
वैज्ञानिकों ने हाल ही में कहा था कि 2100 तक वॉर्मिंग की वजह से समुद्र का लेवल करीब 1.4 मीटर बढ़ जाएगा। जो अऩुमान से दोगुना ज्यादा है। इस खबर के बाद तो लग रहा है कि यह सब 50 सालों में हो जाएगा। साइंटिफिक कमिटी ऑन ऐंटार्कटिक रिसर्च की मानें तो सौ साल में हिंदमहासागर में स्थित द्वीप देश मालदीव और प्रशांत महासागर में स्थित तुवालू द्वीप तो पूरी तरह डूब जाएंगे।
वैज्ञानिकों ने सभी देशों के तटीय शहरों के प्रति चिंता व्यक्त की है। भारत में इसके प्रभाव को देखें तो मुंबई ही नहीं, कोलकाता, मैंगलोर, गोवा, आदि और बांग्लादेश में ढाका के तटीय इलाकों में भारी तबाही होगी। इससे भी बड़ा खतरा अंडमान निकोबार द्वीप समूह और मालद्वीव तो पूरी तरह डूब जायेंगे। पहले ऐसा अनुमान था कि यह सब 100 साल बाद होगा, लेकिन अब तो लग रहा है कि यह सब 50 साल के अंदर ही होने वाला है।












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