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असम हिंसा में 32 मरे, लाखों बेघर, 40000 यात्री मुसीबत में

assam violence
गुवाहाटी। असम में फैली हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है जहाँ पुलिस द्वारा करी गयी फायरिंग और आपसी संघर्षों के चलते 11 लोग और अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं इस तरह असम में मरने वालों कि संख्या 32 हो चुकी है अब तक करीब डेढ़ लाख लोग अपने घर से बेघर हो चुके हैं। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सेना ने असम के धुबरी, कोकराझार, चिरांग और बोंगाईगांव में फ्लैग मार्च करना शुरू कर दिया है।

असम के हिंसा प्रभावित जिलों में केंद्र सरकार ने 4,000 अर्धसैनिक बलों को रवाना किया है। इस बीच, प्रधनमंत्री ने राज्य के मुख्यमंत्री से बातचीत कर क्षेत्र में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा शांति बहाल करने को कहा है।

आपको बताते चलें कि असम में ये संघर्ष 9 जुलाई को शुरू हुआ था जहाँ कुछ अज्ञात लोगों द्वारा 2 मुस्लिम युवकों को गोली मार दी गयी थी उसके बाद पहले तो हिंसा कि छुटपुट वारदात हुई थी फिर बाद में एक विशेष जगह फैली इस हिंसा ने विकराल रूप ले लिया और पूरे असम को अपनी चपेट में ले लिया।

ज्ञात हो कि इस सामुदायिक हिंसा के चलते अब तक करीब 1.5 लाख लोग अपने घर से बेघर हो चुके हैं। वहीँ इस विषय पर पहल करते हुए केंद्र ने जातीय संघर्ष को रोकने के लिए अर्धसैनिक बलों कि संख्या बढ़ा दी है बताया जा रहा है कि 1500 और जवानों को असम भेजा गया है।

इस विषय पर पीएमओ के एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री ने असम के मुख्यमंत्री से बातचीत की और उन्हें स्थिति पर निगरानी रखने, लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा शांति बहाल करने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री ने गोगोई को केंद्र की ओर से हर सम्भव मदद का भी वादा किया। असम में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 29 कम्पनियां असम रवाना की गई हैं।

केंद्रीय गृह सचिव आर. के. सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि हमने 29 कम्पनियां भेजी हैं। 14 कम्पनियां सोमवार को भेजी गई थीं, जबकि अतिरिक्त 15 कम्पनियां मंगलवार को भेजी गई। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के संयुक्त सचिव स्थिति का जायजा लेने के लिए असम का दौरा करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री के अधिकारी पहले से ही असम के मुख्य सचिव तथा पुलिस प्रमुख से सम्पर्क में हैं।

वहीँ असम में फैली इस हिंसा का सबसे बुरा असर रेल सेवा पर देखने को मिल रहा है। जहाँ अभी भी 37 ट्रेने और करीब 40000 मुसाफिर संसाधनों के आभाव के चलते अब तक रास्ते में फंसे है।

सूत्रों से मिली जानकारीं के अनुसार रेल यातायात और रेल यात्रियों को हो रही परेशानी के चलते बीते दिन ही केंद्रीय रेलमंत्री मुकुल रॉय ने गृहमंत्री पी चिदंबरम और असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई से फोन पर बात की है जहाँ उनके द्वारा रेल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।

रेलमंत्री ने कहा है कि असम की हिंसक घटनाओं का असर रेल यातायात पर पड़ा है। तमाम ट्रेनें रास्ते में खड़ी हैं जबकि दर्जनों बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रही हैं। राय ने रेल यात्रियों की सुरक्षा पर बल देते हुए चिंता व्यक्त की और कहा कि राज्य के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में यात्रियों को ले जाने वाली रेलों के सुरक्षित संचालन के लिए उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

असुरक्षित हालात में रेलवे को 26 ट्रेनें रद करनी पड़ी हैं। रेल यातायात में सबसे ज्यादा बाधा श्रीरामपुर और सलाकाटी रेलवे स्टेशनों के बीच के 54 किलोमीटर के रूट पर आई है जहा ट्रेनें लंबे समय से खड़ी हैं।

कौन कौन सी ट्रेन फँसी है रास्ते में

डिब्रूगढ़ कामरूप एक्सप्रेस, गुवाहाटी गरीब रथ, नई दिल्ली-डिब्रूगढ़ राजधानी, नार्थ-ईस्ट एक्सप्रेस, कामाख्या एक्सप्रेस, अवध असम एक्सप्रेस, सिकंदराबाद-गुवाहाटी एक्सप्रेस, गया एक्सप्रेस, गुवाहाटी-बेंगलूर एक्सप्रेस, डिब्रूगढ़-दिल्ली ब्रह्मापुत्र मेल, गुवाहाटी-हावड़ा सरायघाट एक्सप्रेस तथा गुवाहाटी-जम्मू तवी एक्सप्रेस शामिल हैं रास्ते में फंसने वाली ट्रेनों में शामिल हैं।

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