नये नियम से तत्‍काल टिकट में नहीं गल रही दलालों की दाल

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नयी दिल्ली। रेलवे के सामान्य और तत्काल आरक्षित टिकट जारी करने की प्रक्रिया में ठगी और धांधली रोकने के लिए तत्काल रेलवे टिकट की बुकिंग का समय बदलने और नये नियम लागू करने के बाद से दलालों अथवा टिकट एजेंटों की दाल नहीं गल पा रही है। इसीलिए एजेंटों ने सुबह साढ़े छह बजे से तत्‍काल टिकट बुकिंग करने की मांग की है।

अधिकृत एजेंटों के संघ रेल ट्रेवलर्स सर्विस एजेंट एसोसिएशन ने करीब 600 एजेंटों की ओर से रेल मंत्री और रेलवे बोर्ड के अधिकारियों से अपने खिलाफ लगायी गयी पाबंदी खत्म करने की अपील की है तथा तत्काल टिकट की बुकिंग का समय शाम के आखिरी दो घंटे (6:30 से 8:30 के बीच) रखने का सुझाव दिया है।

उल्लेखनीय है कि रेलवे ने 29 जून 2012 को जारी एक वाणिज्यिक परिपत्र के जारिए तत्काल टिकट के आरक्षण का समय सुबह 8:10 बजे की बजाय 10:12 बजे तक कर दिया और इस दौरान अधिकृत एजेंटों पर तत्काल टिकट कटवाने की पाबंदी लगा दी गयी है।

एसोसिएशन के महासचिव राकेश कुमार बंसल ने कहा कि, रेलवे के इस फैसले से अधिकृत एजेंटो को अपने कामधंधे के भविष्य को लेकर गहरी चिंता पैदा हो गयी है। हमारे पास टिकट सेवाएं देने का बाकायदा लाइसेंस है, हम 60,000 रुपए की धरोहर और बैंक गारंटी देते है। हम अपना कार्यालय खोल कर बैठे हैं। हमारे चार चार लोगों को आरक्षण कराने के लिए पुलिस जांच के बाद पहचान पत्र जारी है, पर जब हम लोगों को एक तत्काल टिकट ही नहीं दे सके तो हमारी दुकान पर कौन आएगा।

उन्होंने कहा, रेलवे के इस आदेश से आरक्षित टिकटों की बिक्री में भ्रष्टाचार रुकने की बजाए आरक्षणकेद्रों पर अफरातफरी और अराजकता ही बढ़ी है तथा खुद लाइन में लग कर तत्काल टिकट खरीदने वाले कामकाजी व्यक्तियों को दिन खराब करना पड़ रहा है।

बंसल ने बताया कि उन्होंने रेल मंत्री मुकुल राय और रेलवे बार्ड को सुझाव दिया है कि शाम के आखिरी दो घंटे केवल तत्काल टिकटों की बुकिंग के लिए रखे जाएं तथा तत्काल टिकट एक दिन की बजाय तीन दिन पहले से जारी किए जाएं। इससे तत्काल बुकिंग के समय केंद्रों पर मारा मारी कम होगी।

उन्होंने कहा जब तत्काल टिकट की व्यवस्था लालू प्रसाद यादव के समय शुरू की गयी थी तो सात दिन पहले से इसकी बुकिंग खुल जाती थी। जैसे जैसे समय घटाया गया वैसे वैसे इस सेवा में भ्रष्टाचार बढता गया और इसमें अनधिकृत ऐजेंटों की भूमिका का विस्तार हुआ।

बंसल ने कहा, आप को आरक्षण टिकट नहीं मिलता है तो आप रेल टिकट एजेंटों को दोषी ठहराते हैं। पर हकीकत कुछ और है। एक तो मांग ज्यादा है दूसरे रेलवे आरक्षण व्यवस्था के अंदर ही कुछ स्वार्थीतत्व सक्रिय है जो ई-टिकट का कारोबार करने वाले लाइसेंस धारकों और रेलवे की कैटरिंग और ट्रेवल कंपनी आईआरसीटीसी के लाखों की संख्या में तैनात ऐसे एजेंटों के साथ मिल कर गड़बड़ी फैलाते हैं जिनके लिए कोई नियम लागू नहीं है।

रेलवे ने अधिकृत आरक्षण टिकट एजेंटों की व्यवस्था 1980 के दशक के मध्य में लागू की थी तब से देश भर में करीब 600 एजेंटों को लाइसेंस दिए गए है। राजधानी में ऐसे एजेंटों की संख्या 80 के करीब है।

तत्काल टिकटों की आनलाइन बुकिंग में हेराफेरी और नेटवर्क संपर्क की समस्या के बारे में पूछे जाने पर आईआरसीटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने माना की दिक्कते हैं। उस अधिकारी ने कहा, मूल समस्या मांग और पूर्ति के बीच भारी अंतर की है।

इसके साथ साथ आरक्षण की बुनियादी सुविधाओं और टिकट की उचित कीमत पर भी ध्यान देने की जरूरत है। भारतीय रेल के 8,838 आरक्षण केंद्रों और आईआरसीटीसी की वेबसाइट से हर रोज 15 लाख टिकट जारी किए जाते हैं इनमें 1.7 लाख टिकट तत्काल रेलवे टिकट होते हैं।

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