सोनिया की पार्टी में नहीं गए शरद

गौरतलब है कि एनडीए के सहयोगी दल जदयू और शिवसेना एनडीए के विपरीत प्रणब मुखर्जी का समर्थन कर रहे हैं। कयास लगाया जा रहा था कि कम से कम जदयू इस पार्टी में शिरकत जरूर करेगी क्योंकि जिस प्रकार से वह खुला समर्थन प्रणब को दे रही थी उससे इसका बल मिल रहा था। पर दोनों ही दल सोनिया की पार्टी का भाग नहीं बने। पर पहले प्रणब की उम्मीदवारी का विरोध करने वाली तृणमूल कांग्रेस जरूर सोनिया के भोज में शरीक हुई।
सूत्रों के मुताबिक सोनिया की ओर से संप्रग के सहयोगी दलों के साथ-साथ प्रणब को समर्थन दे रहे राजग के सहयोगी जदयू और शिवसेना के सांसदों को भी इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रण भेजा गया था। पर बुधवार सुबह जदयू अध्यक्ष शरद यादव ने पार्टी के लोकसभा में मुख्य सचेतक वैद्यनाथ महतो और संसदीय दल के महासचिव डॉ. मोनाजिर हसन को निर्देश दिया कि सांसदों को सूचना दे दी जाए कि भोज में शामिल नहीं होना है। जदयू अध्यक्ष शरद यादव और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गैरकांग्रेसवादी रहे हैं। प्रणब को समर्थन देने के पीछे पार्टी का अपना तर्क है। इस भोज में पार्टी के सांसदों के शामिल होने से संदेश जाता कि जदयू कांग्रेस के करीब जा रही है। यही वजह थी कि सांसदों को भोज में शामिल होने से मना कर दिया गया।
पार्टी में शामिल होने वालों में मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव, टीआर बालू समेत कई नेता शामिल थे। इस पार्टी में सबसे बड़ी बात थी कि इन नेताओं को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के टेबल पर बैठाया गया था। सोनिया गांधी की टेबल पर मनमोहन सिंह भी थे। इस टेबल पर अन्य लोगों में आऱएलडी के अजित सिंह औऱ बसपा के सतीश चंद्र मिश्र भी शामिल में थे। तृणमूल की ओर से पार्टी में भाग लेने वालों में सांसद केडी सिंह औऱ सुखेंदु शेखर राय का नाम हैं जिन्होंने अपनी पार्टी की अगुवाई की।












Click it and Unblock the Notifications