बलात्कार शब्द की जगह इस्तेमाल होगा यौन दुराचार

केंद्रीय कैबिनेट ने इस बात को गंभीरता से लिया है। इसलिए बलात्कार और एसिड से हमले के मामलों पर वह और सख्त होने जा रही है। माना जा रहा है कि केंद्रीय मंत्रिमडल की बैठक में बलात्कार से जुड़े आपराधिक कानून में संशोधन पर विचार हो सकता है। इसके तहत सरकार लैंगिक तटस्थता की नीति अपनाते हुए इस कानून से बलात्कार शब्द की जगह यौन दुराचार का इस्तेमाल करेगी और एसिड हमले के मामले में सजा की अवधि को और बढ़ाने की सिफारिश कर सकती है।
सूत्रों ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा तैयार मसौदे में बलात्कार शब्द को बदलकर यौन दुराचार शब्द का प्रयोग करने की बात कही गई है। इसके पीछे सरकार की मंशा औरत और पुरुष दोनों को उनके मानसिकता पर पड़ने वाले गहरे आघात से बचाना है। सूत्र बताते हैं कि पुरुष खास तौर पर बच्चों को कभी कभार इस प्रकार के हमले से गुजरना पड़ता है, इसलिए बलात्कार की जगह यौन दुराचार का प्रयोग करने की बात है। यह आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक 2011 का हिस्सा है। इसके अलावा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 326 में दो नई उपधाराएं शामिल की जाएंगी।
एसिड हमलावर काटेंगे 10 साल की सजा
सरकार एसिड हमला करने वालों की सजा को और बढाने जा रही है। सूत्र बता रहे है कि सरकार अब एसिड हमला करने वालों को पांच से सात वर्ष की बजाय 10 वर्ष न्यूनतम सजा करने की तैयारी में है। सूत्रों ने बताया कि सरकार का मानना है कि सख्त कानून से महिलाओं और देश के कई हिस्सों में शिकार एसिड हमलों से इन्हें बचाया जा सकता है।












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