बेस्ट बेकरी कांड में हुआ न्‍याय

गत 9 जुलाई को बॉम्‍बे आई कोर्ट ने बेस्‍ट बेकरी मामले पर अपना फैसला सुनाया। यह फैसला कई मायने में मील का पत्‍थर है। 5 मार्च को शुरू हुई सुनवाई में 126 दिनों के बाद आया यह फैसला एक तरह से अलग है। बेस्‍ट बेकरी में हुईं पेशियां भी एक दम अलग थीं। यह खुली अदालत में हुईं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे, और 9 जुलाई को जब प्रक्रिया पूरी हुई तो एक बड़े खुलासे पर से पर्दा उठा। यह पर्दा उस केस के ऊपर से उठा जिसमें अनगिनत बार सुनवाई टली, कई प्रकार के कयास लगाये गये, संकेत मिले और मीडिया का तमाशा देखने को मिला। इस केस की पारदर्शी सुनवाई और फैसले के लिये बॉम्‍बे हाई कोर्ट बधाई का पात्र है।

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इस फैसले ने गुजरात दंगे के घरेलू उद्योग के ताबूत पर आखिरी कील ठोकने का काम किया, जिसे लेकर गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी पर कई बार उंगलियां उठीं।

एक दशक तक चलने वाले बेस्‍ट बेकरी मामले ने हमें दिखाया कि यह मामला धर्मनिर्पेक्ष-वामपंथी-उदार-सक्रिय प्रतिभागियों के समूह द्वारा तैयार किये गये 'पांच सितारा' मामलों में से एक है, जिसमें मोदी को गलत ठहराने के प्रयास किये गये।

बेस्‍ट बेकरी केस का मुख्‍य चेहरा थी जहीरा शेख, जिसने 2 मार्च 2002 को इस मामले में एफआईआर दर्ज करायी। कुछ समय बाद जब मामला उछला, तब एक बड़ा तथ्‍य देखने को मिला।

कई वर्षों तक बेस्‍ट बेकरी मामले के फंसे होने का महत्‍वपूर्ण कारण है कुछ लोगों का एक समूह नहीं चाहता था कि यह केस कभी बंद हो। कोर्ट का बार-बार स्‍थगित होना और नई अपील दायर होना उन लोगों के लिए दावतों के मौके के समान था, जिनके लिये इंसानियंत का कोई मोल नहीं।

9 जुलाई को जब जस्टिस पीडी कोडे का फैसला आया तो उस फैसले में निचली अदालत को कड़ी फटकार लगायी गई। जस्टिस कोडे ने निचली अदालत की उस बात की आलोचना की, जिसमें जहीरा शेख को कोई आर्थिक प्रलोभन दिया गया है। कोर्ट ने पूछा कि बिना नाम लिये ऐसा कैसे कहा जा सकता है, और कोर्ट की यह बात आगे चलकर अब उन लोगों के खिलाफ हथियार बन गये है।

कोर्ट के फैसले के मुख्‍य बिंदु इस प्राकर हैं-

  • 9 में से चार को उम्रकैद की सजा दी गई, और बाकियों को रिहा कर दिया गया।
  • चार प्रत्‍यक्षदर्शियों को तीन-तीन लाख रुपए का मुआवजा दिया गया।
  • जहीरा शेख की नंद यासीन बानो शेख को तीन लाख रुपए का पुरस्‍कार दिया गया, क्‍योंकि उसने अदालत के सामने सच बोलने की हिम्‍मत दिखायी।
  • निचली कोर्ट के आदेश को इस बिला पर निरस्‍त कर दिया गया।
  • निचली अदालत ने गुजरात राज्‍य और वकील के खिलाफ की गईं टिप्‍पणियों को दरकिनार कर दिया गया।

हालांकि इस मामले का एक महत्‍वपूर्ण पहलु समाजसेविका तीस्‍ता सीतलवाड़ से भी जुड़ा है। उन्‍हें सांप्रदायिक न्‍याय की चैंपियन भी कहा जाता है। उनकी कथित स्‍टार प्रत्‍यक्षदर्शी आगे चलकर कोर्ट में पलट गई और तीस्‍ता सीतलवाड़ के खिलाफ बयान दे डाले, कि कैसे उसका उत्‍पीड़न किया। इसके बाद तीस्‍ता को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी।

तीस्‍ता को मदद पहुंचाने वाला रईस खान, जिसने तीस्‍ता के खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों को सितंबर 2011 में फिर ऊपर उठाया। अपने शपथपत्र में उन्‍होंने बताया कि कैसे तीस्‍ता ने जहीरा, यासमीन और कई अन्‍य गवाहों को मुंबई के भिंडी बाजार में एक जेल रूपी घर में रखा। इस शपथपत्र को पढ़ने के बाद कोई भी चौंक जायेगा कि न्‍याय की प्‍यासी तीस्‍ता इस हद तक कैसे जा सकती हैं। रईस खान ने बॉम्‍बे हाई कोर्ट के सामने वो सभी बातें बयान की किस तरह से तीस्‍ता ने उसे हत्‍या की धमकी दी। एक अन्‍य याचिका में रईस खान ने आरोप लगाया

तीस्‍ता के आपराधिक कृत्‍यों की सूची काफी लंबी है, जिसमें बॉम्‍बे हाई कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की गई। इसी के साथ इस फैसले ने मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी को निर्दोष साबित किया।

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