युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान के बच्चों का आत्मविश्वास जगाता है 'रिक्शा सर्कस'

उन्हें पुलिस की सुरक्षा लेनी पड़ी और टिकट लेने वालों को मंच तक लाने के लिए रास्ता बताने की खातिर रिक्शे को ट्रकों पर तक रखना पड़ा। इस जोड़े का इरादा चैरिटी के लिए धन जुटाना था और यह राशि युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान के बच्चों का आत्मविश्वास जगाने के लिए उनको सर्कस का प्रशिक्षण देने में खर्च की जानी थी।
अदनान 11 जुलाई को 25 वर्षीय अन्निका के साथ काबुल से इस्लामाबाद के लिए निकले। अफगानिस्तान की राजधानी में इन्होंने आठ माह बिताए। अफगान पुलिस की निगरानी में सड़क मार्ग से दोनों पहले जलालाबाद और फिर पाकिस्तान की सीमाई कबायली पट्टी पहुंचे। वॉशिंगटन इस कबायली पट्टी को अलकायदा का वैश्विक मुख्यालय समझता है और उसे लगता है कि यहीं से तालिबान और अन्य उग्रवादी अफगानिस्तान और पश्चिम के खिलाफ हमले की साजिश रचते हैं।
यहां बरसों से पश्चिमी पर्यटक भी नजर नहीं आए। बहरहाल, लोगों ने यहां तीन पहियों वाले, पीले हरे रिक्शे को घूमते देखा जिस पर रिक्शा सर्कस का बोर्ड लगा था।इस रिक्शे को अपहरण, आत्मघाती हमलों और आम हमलों की परवाह नहीं थी।
अदनान ने फोन पर से जानकारी देते हुए कहा कि मैं आखिरकार अपना रिक्शा पाकिस्तान ले ही आया। अच्छा लगा। अब अदनान पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर शहर पेशावर जाने वाले हैं और फिर वह इस्लामाबाद जाएंगे। पाकिस्तान से उनका रिक्शा ईरान और फिर तुर्की जाएगा।












Click it and Unblock the Notifications