पेशाब पिलाने की घटना पर कोर्ट ने पीएम से मांगा जवाब

आपको बता दें की इस बार पीएम पर अपना सिकंजा कसा है कोलकाता हाई कोर्ट ने विश्वभारती विश्वविद्यालय के तहत चलने वाले स्कूल में पांचवी की छात्रा को सजा के रूप में पेशाब पिलाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए बीते दिन विश्वविद्यालय के चांसलर व पीएम मनमोहन सिंह से जवाब मांगा है।
गौरतलब है की बीते दिनों 8 जुलाई की रात को एक महिला वार्डन ने एक बच्ची को ऐसी सजा दी थी जिसे सिर्फ सुनकर ही इन्सान की रूह काँप जाएगी। उस रात एक महिला वार्डन उमा पोद्दार ने औचक निरीक्षण के दौरान छात्रा सुनीता (बदला हुआ नाम ) को बिस्तर गीला करने का दोषी पाया और अपना आपा खोते हुए वार्डन ने सजा के तौर पर चादर निचोड़कर छात्रा को जबरन उसी का पेशाब पिलाया था। जहां घटना की जानकारी मिलने के बाद छात्रा के अभिभावकों समेत कई अन्य लोगों ने छात्रावास परिसर में पहुंचकर हंगामा किया । साथ ही विश्वविद्यालय ने मामले की जांच के लिए एक कमेटी भी बनाई।
मुख्य न्यायाधीश जेएन पटेल तथा न्यायमूर्ति संबुध चक्रवर्ती की पीठ ने एक पीआईएल पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है । याचिका में दावा किया गया है कि विश्वभारती ने कोर्ट के पूर्व निर्देशों की अवहेलना करते हुए छात्रा को फिजिकल दंड दिया है।
जनहित याचिका दाखिल करने वाले तपस भांजा ने जानकारी देते हुए बताया कि कोर्ट ने मुझे विश्वविद्यालय के चांसलर प्रधानमंत्री, कुलपति सुशांत दत्ता गुप्ता, कुलसचिव मणि मुकुट मित्रा, हॉस्टल वार्डन उमा पोद्दार तथा पश्चिम बंगाल के शिक्षा सचिव बिक्रम सेन को नोटिस देने को कहा है।
साथ ही कलकत्ता हाई कोर्ट ने 2004 में ही स्कूलों में किसी भी प्रकार के शारीरिक दंड देने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद कोर्ट ने 2009 में समुचित दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा था कि छात्रों को शारीरिक दंड देने के बजाय उन्हें परामर्श दिया जाए।
कोर्ट ने राज्य सरकार से भी कहा था कि वह शारीरिक दंड के खिलाफ व्यापक प्रचार करे। साथ ही दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया था। आपको बता दें कि मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।












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