जम्मू-कश्मीर से फिलहाल कम नहीं होंगे सुरक्षा बल

यह पूछे जाने पर कि क्या जम्मू कश्मीर में सैनिकों की संख्या में कमी करने का कोई प्रस्ताव है, एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा कि नहीं ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। हमें आतंकवादियों पर दबाव बनाये रखना है। यदि आप दबाव कम करेंगे तो हमें समस्या का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य में स्थिति में काफी सुधार हुआ है लेकिन यह वैसी स्थिति में नहीं पहुंचा है जब सरकार की ओर से ऐसा कदम उठाया जाए।
अधिकारी ने कहा कि घाटी में शांति विरोधी तत्व अभी भी सक्रिय है और वर्तमान महौल को बनाये रखने के लिए सतत निगरानी बनाये रखने की आवश्यकता है। इस मुद्दे पर सेना का यह रुख राज्य की सुरक्षा स्थिति में सुधार के मद्देनजर विभिन्न समूहों की ओर से राज्य के कुछ हिस्सों से विवादास्पद सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून हटाने की मांग की पृष्ठभूमि में आया है।
वहीं दूसरी तरफ अपने 40 साल के करियर में अधिकतर समय जम्मू-कश्मीर में बिताने वाले सेना जनरल प्रमुख बिक्रम सिंह ने यह कहते हुए घाटी में बिताये दिनों को याद किया कि उन्होंने वहां अपना खून बहाया है जब वहां एक आतंकवादी हमले में एक बार वह घायल हो गए थे। उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी हमेशा मेरे दिमाग में है।












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