डा. राजेंद्र प्रसाद के बताये रास्‍ते पर चले राष्‍ट्रपति: प्रणब

Pranab Mukherjee
कोलकाता। संप्रग की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी ने आज कहा कि देश के सर्वोच्च पद पर आसीन होने वाले किसी भी व्यक्ति को आधुनिक भारत के संस्थापकों द्वारा स्थापित परंपराओं को बनाए रखना होगा। साथ ही राष्ट्रपति का पद दलगत राजनीति से उपर होता है।

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉक्टर जाकिर हुसैन और इनके बाद राष्ट्रपति बने लोगों की मिसाल देते हुए प्रणव ने कहा कि इनकी ओर से स्थापित मानकों और परंपराओं के मुताबिक रहना उनका प्रयास रहेगा।

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की गरीब-समर्थक राजनीति से सीखने का उल्लेख करते हुए प्रणव ने कहा, "यह मेरा सपना रहा है कि मेरे जीते जी गरीबी रूपी भयावह दुख का खात्मा हो जाए।" वह माकपा, फारवर्ड ब्लॉक, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) और डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट पार्टी (डीएसपी) के विधायकों को विधान भवन के परिसर में संबोधित कर रहे थे।

प्रणव ने कहा, "राष्ट्र के जीवन का मार्ग कभी भी विवादों से निरंतर मुक्त नहीं हो सकता। यह हमारे लिए जरूरी बना देता है कि हम मतभेदों को दरकिनार करें और राष्ट्र की सेवा के लिए एकजुट हो जाएं।" प्रणव ने कहा कि उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत अपने गांव से की और उन्हें पिता कामदा किंकर और मां राजलक्ष्मी के जरिए लोक सेवा करने की प्रेरणा मिली।

पूर्व वित्त मंत्री ने कहा, "देश को उस ओर ले जाया जाना चाहिए जहां जाति, पंथ अथवा धर्म से इतर हर नौजवान नागरिक के पास बराबर का अवसर हो।" उन्होंने कहा कि वह सम्मानित महसूस करते हैं कि संप्रग और उसके सहयोगी दलों ने उन्हें राष्ट्रपति पद के योग्य समझा। प्रणव ने कहा, "राष्ट्रपति का पद दलगत राजनीति से उपर होता है। अवसर मिलने पर मैं इस पद की गरिमा और मूल्यों की हिफाजत करने का पूरा प्रयास करूंगा।"

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